Lucknow News: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का जल्द होगा एलान, युवा दलित नेता असीम अरुण रेस में आगे

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा फेरबदल जल्द देखने को मिल सकता है, क्योंकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के नए चेहरे का एलान जल्द होने वाला है। यह घोषणा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिल्ली दौरे से लौटने के बाद कभी भी की जा सकती है। योगी आदित्यनाथ का जोर इस बार एक ऊर्जावान, शिक्षित और प्रभावशाली दलित नेता को प्रदेश संगठन की कमान सौंपने पर है, ताकि सपा, बसपा और कांग्रेस के जातीय समीकरणों को कड़ी चुनौती दी जा सके।

हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले और इसके जवाब में चलाए गए ऑपरेशन 'सिंदूर' के चलते पार्टी संगठनात्मक चुनावों को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया था। लेकिन अब 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के चयन की अंतिम तैयारी में जुटी है। अब तक 98 में से 70 जिला और शहर अध्यक्षों की नियुक्ति पूरी हो चुकी है, और पार्टी संविधान के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष के चयन का रास्ता भी साफ हो गया है।

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दलित चेहरे पर फोकस, असीम अरुण का नाम सबसे आगे

भाजपा और संघ दोनों के भीतर एक दलित अध्यक्ष की संभावना पर गंभीरता से विचार हो रहा है। इस बीच समाज कल्याण मंत्री और पूर्व आईपीएस अधिकारी असीम अरुण का नाम सबसे प्रबल दावेदार के रूप में उभर कर आया है। असीम अरुण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंद माने जाते हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी करीबी माने जाते हैं। उनकी छवि पढ़े-लिखे, मजबूत प्रशासक और युवाओं के बीच लोकप्रिय नेता की है।

असीम अरुण की लोकप्रियता खासकर दलित युवाओं में तेजी से बढ़ी है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ उनके हालिया सख्त रुख ने उन्हें भाजपा समर्थकों के साथ-साथ दलित मतदाताओं के बीच भी मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया है।

अन्य संभावित दावेदार भी दौड़ में

हालांकि अध्यक्ष पद की रेस में कई अन्य नाम भी चर्चा में हैं। इनमें मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, धर्मपाल सिंह, केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा, राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद, पूर्व सांसद रामशंकर कठेरिया, विनोद सोनकर, नीलम सोनकर और पूर्व एमएलसी विद्यासागर सोनकर शामिल हैं। वहीं ब्राह्मण समुदाय से दिनेश शर्मा और हरीश द्विवेदी के नाम भी सुर्खियों में हैं।

अहिल्याबाई जन्मशती अभियान से सामाजिक समीकरण साधने की तैयारी

भाजपा 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी मजबूत पकड़ बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत अहिल्याबाई होल्कर की जन्मशती के बहाने सामाजिक समीकरण साधे जा रहे हैं। राज्य की 8135 न्याय पंचायतों में 2.7 लाख कार्यकर्ताओं की टीम बनाई जा रही है, जिसमें संगठन और सरकार दोनों के नेता सक्रिय भूमिका निभाएंगे। यह अभियान खासतौर पर पाल और धनगर समुदाय को साधने की कोशिश है, जिससे सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठजोड़ को चुनौती दी जा सके।

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