Lucknow Fire Tragedy: अलीगंज अग्निकांड में 18 की मौत, शॉर्ट सर्किट की आशंका; इमरजेंसी निकास न होने से बढ़ी त्रासदी

लखनऊ। राजधानी के अलीगंज सेक्टर-डी स्थित एक चार मंजिला व्यावसायिक भवन में सोमवार दोपहर लगी भीषण आग ने 18 युवाओं की जिंदगी छीन ली। मृतकों में छह महिलाएं और 12 पुरुष शामिल हैं। हादसे में नौ अन्य लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण एसी में शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

दोपहर 2:15 बजे भड़की आग, मच गई अफरा-तफरी

जानकारी के अनुसार अलीगंज सेक्टर-डी स्थित इस बहुमंजिला भवन में बेसमेंट, भूतल और प्रथम तल पर पेट शॉप एवं क्लीनिक संचालित थे, जबकि दूसरी मंजिल पर ‘लर्निंग स्पेस’ नामक लाइब्रेरी और ‘हेड हॉपर स्टूडियो’ नामक एनीमेशन एवं गेमिंग कंपनी का कार्यालय था। दोपहर करीब 2:15 बजे पहली मंजिल पर अचानक आग लग गई, जिसने देखते ही देखते पूरे भवन को अपनी चपेट में ले लिया।

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आग और धुएं के कारण लाइब्रेरी में पढ़ रहे छात्र तथा एनीमेशन कंपनी के कर्मचारी अंदर फंस गए। कई छात्रों ने जान बचाने के लिए खुद को बाथरूम में बंद कर लिया, जबकि कुछ ने खिड़कियों और तारों के सहारे बाहर निकलने का प्रयास किया। एक छात्र ने पहली मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जान बचाई।

दीवार काटकर शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, अग्निशमन विभाग, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गईं। शुरुआती प्रयासों में सामने से आग पर काबू पाने में सफलता नहीं मिली। इसके बाद पुलिस और दमकल कर्मियों ने पास की इमारत की छत से भवन की दीवार काटकर अंदर पहुंचने का रास्ता बनाया। स्मोक एग्जॉस्ट सिस्टम लगाकर धुआं बाहर निकाला गया और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।

करीब पांच घंटे तक चले अभियान में कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि बड़ी संख्या में लोग धुएं की चपेट में आने से दम घुटने का शिकार हो गए।

इमरजेंसी निकास का अभाव बना बड़ी वजह

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि भवन में आपातकालीन निकास (Emergency Exit) की व्यवस्था नहीं थी। यही कारण रहा कि आग लगने के बाद अंदर मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। अधिकारियों के अनुसार भवन सुरक्षा मानकों की भी जांच की जा रही है।

मौके पर पहुंचे मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री

हादसे की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री घटनास्थल पर पहुंचे और राहत कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को घायलों के बेहतर उपचार और घटना की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए।

एंबुलेंस व्यवस्था पर नाराज हुए उपमुख्यमंत्री

रेस्क्यू के दौरान बड़ी संख्या में शव बरामद होने लगे, जबकि मौके पर उपलब्ध एंबुलेंसों की संख्या कम पड़ गई। स्थिति को देखकर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाई। इसके बाद अतिरिक्त एंबुलेंसों को तत्काल मौके पर भेजा गया।

ऑटोमैटिक लॉक सिस्टम बना बाधा

हादसे में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिजनों ने बताया कि कार्यालय का मुख्य प्रवेश द्वार थंब इम्प्रेशन आधारित ऑटोमैटिक लॉक सिस्टम से संचालित होता था। आग लगने के बाद सिस्टम प्रभावित हो गया और गेट समय पर नहीं खुल सका, जिससे कई लोग अंदर फंस गए।

मृतकों और घायलों की पहचान

प्रशासन द्वारा मृतकों और घायलों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जबकि घायलों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।

इनकी हुई मौत   

हादसे में सागर (27), नीलेश (27), अनामिका (28), अनुक्षा (25), सुमल्या (30), शाहजान (19), आदित्य श्रीवास्तव (23), अब्दुल रहमान (24), सुखमनी (23), अम्मार, जैनिल, ज्योति, संयम, भविष्य व सूरज।

ये हुए घायल   

जयंत, लवप्रीत, मो. आसिफ, भुवन श्रीवास्तव, पंकज, शैलेंद्र, अभिषेक, पंकज जोशी, गौरव कुमार।

जांच के आदेश

प्रशासन ने हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं। भवन निर्माण, अग्नि सुरक्षा मानकों, विद्युत व्यवस्था और संचालन से जुड़ी सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही गई है।

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