देवरिया हत्याकांड: पुलिस को 20 फरार आरोपियों का अब तक नहीं मिला सुराग, 17 लोगों का असलहा लाइसेंस होगा निरस्त

Deoria Murder Case: उत्तर प्रदेश में देवरिया जनपद के रुद्रपुर कोतवाली क्षेत्र के फतेहपुर गांव में छह लोगों की हत्या के मामले में अभी भी 20 लोग पुलिस की पकड़ से काफी दूर हैं. यूपी में कई जगह सहित बिहार में दबिश के बावजूद पुलिस इनका कोई सुराग नहीं पता लगा सकी है. इस केस में अभी तक 21 आरोपित जेल भेजे जा चुके हैं. इस बीच हत्याकांड के बाद असलहों के लाइसेंस की गहन जांच पड़ताल की जा रही है. इसी कड़ी में गांव के नौ लोगों के असलहे का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है. वहीं अब इनके निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है. गांव में खून की होली खेले जाने के बाद जांच पड़ताल में सामना आया है कि फतेहपुर ग्राम पंचायत में अभी तक 27 लोगों के पास असलहे का लाइसेंस रहा है. अब हर एक लाइसेंसधारी का इतिहास खंगाला जा रहा है. इसी कड़ी में गांव के नौ लोगों के असलहे का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है, वहीं अब इनके निरस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी गई है. अधिकारियों के मुताबिक घटना के बाद से ही मृतक प्रेमचंद यादव समेत 17 लोगों के असलहे का लाइसेंस निरस्त करने के लिए चिह्नित किया गया है. इसी कड़ी में मृतक प्रेमचंद यादव, उमेश यादव, कन्हैया, निशांत, रामनगीना, चंद्रप्रकाश, कमलेश, सुरेन्द्र व शारदा के असलहे के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए और उन्हें नोटिस दिया गया है.

पुलिस के दावों पर उठे सवाल

अधिकारियों के मुताबिक इसके बाद जिलाधिकारी के यहां इसकी सुनवाई होगी. फिर इनके असलहों के निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी. वहीं प्रकरण को लेकर अभयनाथ यादव, अनिरुद्ध यादव व गेंदा लाल यादव का लाइसेंस पहले ही निरस्त किया जा चुका है. इस बीच यूपी पुलिस के मुख्य हत्यारोपित नवनाथ मिश्र के पास से रायफल बरामद होने के दावे पर सवाल उठ रहे हैं.

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प्रेमचंद यादव की पत्नी प्रेमशीला का वीडियो सामने आया है, जिसमें उसने स्वीकार किया है कि जिस रायफल से सामूहिक नरसंहार की घटना को अंजाम दिया गया, वह रायफल घटना के बाद पुलिस को उसने ही सौंपा था. हत्यारोपित नवनाथ मिश्र को पुलिस ने वारदात के बाद फतेहपुर गांव के अभयपुर टोले के मनौली तिराहे से गिरफ्तार किया था और उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया था. आरोपित नवनाथ मिश्र प्रेमचंद के साथ रहता था और उसका चालक था. पुलिस का दावा है कि चालक नवनाथ मिश्र ने सत्यप्रकाश दुबे व उनके परिवार पर रायफल से तीन राउंड फायर किया जाना स्वीकार किया था.

अब तक 21 आरोपी भेजे जा चुक जेल

इस बीच इस प्रकरण में 20 अज्ञात लोगों की पहचान होने के बाद भी पुलिस अभी तक उनको गिरफ्तार नहीं कर सकी है. पु​लिस की टीमें आरोपियो की तलाश में कई जगद दबिश दे रही हैं, लेकिन फरार आरोपियों कोई सुराग अब तक नहीं मिल सका है. प्रकरण में अभी तक 21 आरोपित जेल भेजे जा चुके हैं.

हत्याकांड के बाद लखनऊ तक मचा हड़कंप

दो अक्टूबर को हुए खूनी खेल से पूरा देवरिया ही नहीं लखनऊ तक हड़कंप मच गया था. अभयपुर के प्रेमचंद यादव की हत्या के बाद लेहड़ा के सत्य प्रकाश दुबे व उनके परिवार के चार सदस्यों की हत्या कर दी गई. सत्य प्रकाश दुबे व उनके परिवार के सदस्यों का हुई हत्या के मामले में पुलिस 27 नामजद व 50 अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया है. चार दिनों के अंदर मुख्य आरोपित नवनाथ मिश्र समेत 21 आरोपित को पुलिस ने जेल भेज दिया, इसमें से 17 आरोपित नामजद शामिल हैं.

आरोपियों की पुलिस ने की पहचान

कहा जा रहा है कि रायफल मौके पर ले जाने वाले संदीप यादव व गोलू यादव समेत कुल 20 अज्ञातों की पहचान पुलिस ने कर ली है. घटना के बाद से ही सभी आरोपित फरार हैं, इनके मोबाइल फोन नंबर भी बंद चल रहे हैं, जिसके चलते आरोपितों का लोकेशन पुलिस को नहीं मिल पा रहा है. रिश्तेदार व उनके मित्रों के यहां भी पुलिस लगातार दबिश दे रही है, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हो पा रही है. पुलिस ने बिहार के सिवान, मऊ जनपद में भी दबिश दी, लेकिन आरोपित पुलिस के हाथ नहीं लग सके.

मामले में सियासत जारी

उधर इस प्रकरण में सियासत भी लगातार जारी है. भाजपा और प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी की ओर से एक दूसरे पर जुबानी हमला किया जा रहा है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के देवरिया पहुंचने से पहले मारे गए पीड़ित परिवार के देवेश दुबे ने उनसे इनकार कर दिया और कहा कि वह अपने गांव फतेहपुर के लेहड़ा टोला नहीं जाएगा. उसने कहा कि वर्ष 2014 में सपा सरकार में उसके पिता सत्य प्रकाश दुबे ने अपनी जमीन पर दबंग प्रेमचंद यादव के बैनामा कराने की शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. वहीं अखिलेश यादव ने फतेहपुर गांव में सत्यप्रकाश दुबे और पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेमचंद यादव के घर पहुंचने पर परिजनों से मुलाकात की.

अखिलेश यादव ने की सही खुलासे की मांग

अखिलेश यादव ने कहा कि यह घटना शासन प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण बन जाता है क्योंकि अभी तक जो सरकार जीरो टोलरेंस की बात करती थी तो इतनी बड़ी घटना कैसे हो गई? उसकी सच्चाई अभी तक सामने लेकर नहीं आ पाए हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी जाति के नाम पर राजनीति कर रही है. बुलडोजर को घर से गिराने की बात कहकर डरना चाहते हैं. सवाल आपकी मंशा का है, मदद दोनों पक्षों की जाए. बुलडोजर जनता चलाने नहीं देगी. यह घटना बहुत ही अफोसजनक है. अखिलेश यादव ने कहा कि मैं मानता हूं डीएम ने जो बात कही कि रिटेलिएशन में घटना हुई. प्रेम यादव की जान नहीं जाती तो किसी की जान नहीं जाती. आखिरकार सरकार क्यों इस बात को छुपाना चाहती है कि प्रेम यादव को बुलाकर के मारा और किसने मारा.

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