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बलिया में दर्दनाक हादसा : बहन की डोली से पहले उठी भाई की अर्थी, रोया हर दिल
सिकन्दरपुर, बलिया : कल जहां बसती थी खुशियां, आज हैै मातम वहां... वक्त ही लाया था बहारें, वक्त ही लाया है खिजां...। कुछ ऐसी ही तस्वीर सिकन्दरपुर के नगरा मोड़ निवासी उस परिवार में दिखी, जहां बेटी की शादी की तैयारियों के बीच बेटे की अर्थी उठी। इकलौते बेटे के शव को सीने से लगाने की जुगत में मां रोते-रोते अचेत हो जा रही थी। पिता को मानों काठ मार गया हो। भाई की मौत से बहनों का रोते-रोते बुरा हाल था। वहीं, आस-पास के लोगों की जुटी भीड़ भी सुबक रही थी। लोग समझ नहीं पा रहे थे कि क्या कहकर इस परिवार को ढ़ांढ़स बंधाया जाय।
घर-परिवार का माहौल पूरी तरह शादी के रंग में रंग चुका था। परिजन शादी की तैयारी में जुटे थे। नाते-रिश्तेदारों का आना जाना लगा था।गुरुवार को घर में हल्दी का रस्म होना था। उधर, जूही की शादी में शामिल होने के लिए बुधवार को प्रयागराज से उसकी सहेली प्रियंका अपने भाई शिवांश के साथ आई थी। गुरुवार को दादर एक्सप्रेस पकड़वाने के लिए शिवम, शिवांश को बेल्थरारोड जा रहा था। लेकिन रास्ते में पीछे से आ रही एंबुलेंस रूपी मौत ने शिवम को झपट लिया। जबकि शिवांश गंभीर रूप से घायल हो गया। उसका इलाज चल रहा है। हादसे की सूचना मिलते ही खुशी का माहौल गम की चादर ओढ़ लिया। मंगल गीतों की जगह करूण-क्रंदन और चीत्कार मच गया।
तैयारियां चल रही थीं। उसी समय छोटे भाई की मौत की सूचना से शहनाइयों वाले घर में मातम पसर गया। मां राजकुमारी देवी, पिता शशिकांत गुप्त सहित बड़ी बहन जूही और पूर्णिमा के करुण क्रंदन से पूरा माहौल गमगीन हो उठा।
मूलतः खेजुरी थाना क्षेत्र के हरिपुर निवासी शशिकांत गुप्ता दो दशक से सिकंदरपुर में मोटरपार्ट्स की दुकान चलाते हैं। उनकी दोनों बेटियां प्रयागराज में रह कर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करती हैं। जबकि इकलौता बेटा शिवम सिकंदरपुर में मां और पिता के साथ रहता था। जो ग्यारहवीं का छात्र था।
शाम को शिवम का शव जैसे सिकंदरपुर स्थित उसके आवास पर पहुंचा परिजनों की चीत्कार से लोगों का कलेजा फट गया। लोगबाग यह कहते नजर आए कि काल ने क्रूर पंजे ने गुप्ता परिवार को कभी न भूलने वाला गम दे दिया है। जिस पिता को बेटी का कन्यादान करना था उसे अब इकलौते पुत्र की मुखग्नि देनी पड़ रही है। उधर गमगीन माहौल में महावीर घाट को उसका अंतिम संस्कार किया गया।
शिवम
भाई का सपना, अपनी प्यारी बहना की डोली को विदा करना होता है लेकिन जब डोली उठने से पहले ही भाई की अर्थी उठ जाए तो यह वज्रपात से कम नहीं। गुरुवार को ऐसा ही वज्रपात गुप्ता परिवार पर हुआ।
