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नागार्जुन की जीवन यात्रा को शब्दों में समेटना कठिन : डॉ. जनार्दन राय
Ballia News : किसान नेता स्वामी सहजानंद की रहनुमाई में विश्वास करने वाले विद्रोही जनकवि वैद्यनाथ मिश्र नागार्जुन की पुण्यतिथि 'कवि कुटीर' काशीपुर सभागार में रविवार को मनाई गयी। जनपद के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जनार्दन राय (Senior litterateur Dr. Janardan Rai) ने कहा कि साहित्य की लगभग हर विधा में निष्णात माने जाने वाले नागार्जुन को लेकर अनेक लोगों ने अपने-अपने ढंग से लिखा है। कोई उनके परम्पराभंजक और प्रगतिशील रूप को अहमियत देता है तो कोई उन्हें जनकवि कहता है।
कवि की रचनाओं में राष्ट्रीय स्वाधीनता और यथार्थ अभिव्यक्ति के साथ अव्यवस्था, अराजकता, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी पर करारा प्रहार है। नागार्जुन ऐसी शख्सियत थे, जिनकी जीवन यात्रा को एक लेख या कुछ शब्दों में समेटना कठिन है। बचपन में ही मां की ममता से वंचित रहे नागार्जुन का पूरा जीवन साहित्य, सृजन और समाज के नाम रहा। अमरदेव राय, डॉ. श्रीपति कुमार यादव, नीतीश शेखर, विवेक पाठक, संजय वर्मा, राममूरत सिंह इत्यादि मौजूद रहे।
