पूंडरी मंडी विवाद: खरीद में देरी की असली वजह नमी और जांच प्रक्रिया, अदाणी साइलो पर सवालों के बीच सामने आई जमीनी तस्वीर

कैथल। हरियाणा के कैथल जिले की पूंडरी अनाज मंडी में गेहूं खरीद को लेकर चल रहा विवाद लगातार चर्चा में है। हालांकि जमीनी स्तर पर सामने आ रही जानकारी बताती है कि खरीद में देरी की प्रमुख वजह बारिश के बाद गेहूं में बढ़ी नमी, चमक कम होना और गुणवत्ता जांच है, न कि केवल किसी एक निजी कंपनी की भूमिका। हाल में जिला प्रशासन ने भी मंडी में तैयारियों और किसान सुविधाओं की समीक्षा की थी।

सूत्रों के अनुसार, बारिश के कारण कई जगह गेहूं में नमी अधिक पाई गई है। इसी वजह से एफसीआई ने सैंपल लेकर कृषि विभाग को जांच के लिए भेजे हैं। जांच रिपोर्ट और निर्देश मिलने के बाद ही खरीद प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। इसी बीच मंडी में किसानों की सुविधा के लिए अटल कैंटीन, पेयजल, बायोमेट्रिक मशीन और गेट मैनेजमेंट जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं। 

यह समझना जरूरी है कि गेहूं की सरकारी खरीद, भंडारण और आगे वितरण का मुख्य निर्णय भारतीय खाद्य निगम (FCI) और अधिकृत सरकारी एजेंसियों के स्तर पर होता है। निजी साइलो ऑपरेटर, जैसे Adani Group की लॉजिस्टिक्स इकाई, मुख्य रूप से भंडारण और हैंडलिंग सुविधा उपलब्ध कराते हैं। खरीद शुरू करने, भुगतान, गुणवत्ता मानक और एजेंसी आवंटन जैसे फैसले सरकारी प्रक्रिया के तहत होते हैं। इस मॉडल का इस्तेमाल हरियाणा में पहले भी हो चुका है। 

मंडी में हाल में लागू बायोमेट्रिक सत्यापन, जियो-फेंसिंग, गेट पास और ट्रॉली पंजीकरण जैसी नई व्यवस्थाएं भी किसानों के लिए शुरुआती असुविधा का कारण बन रही हैं। प्रशासन का कहना है कि इनका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और खरीद प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है। 

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि विरोध में शामिल कुछ लोग वास्तविक किसान नहीं हैं और नए नियमों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अफवाहों से बचते हुए एफसीआई और जिला प्रशासन के आधिकारिक निर्देशों का इंतजार करना ही बेहतर होगा।

सूत्रों के मुताबिक, जांच रिपोर्ट आने के बाद अगले कुछ दिनों में खरीद शुरू होने की उम्मीद है। ऐसे में किसी एक नाम या संस्था को बिना पूरी प्रक्रिया समझे जिम्मेदार ठहराना विवाद को और बढ़ा सकता है, जबकि वास्तविक मुद्दा इस समय नमी, गुणवत्ता जांच और प्रशासनिक मंजूरी का है।

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