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एनर्जी और इंटेलिजेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर तय करेंगे भारत की ताकत : गौतम अदाणी
नई दिल्ली। ने कहा है कि दुनिया एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां किसी देश की वास्तविक ताकत उसकी ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इन्फ्रास्ट्रक्चर से तय होगी। उन्होंने कहा कि भारत को अपने “इंटेलिजेंस फ्यूचर” का निर्माता और मालिक बनना होगा।
उन्होंने कहा कि आज की दुनिया अधिक प्रतिस्पर्धी और विभाजित हो चुकी है। सेमीकंडक्टर अब केवल तकनीक नहीं, बल्कि रणनीतिक शक्ति का हिस्सा बन गए हैं। डेटा को राष्ट्रीय संसाधन के रूप में देखा जा रहा है और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर भी राष्ट्रीय शक्ति का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है।
अदाणी ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा अब राष्ट्रीय शक्ति के दो प्रमुख स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि जो देश अपनी ऊर्जा जरूरतों और कंप्यूट क्षमता को नियंत्रित करेगा, वही अपने औद्योगिक और बौद्धिक भविष्य को दिशा देगा।
उन्होंने एआई को केवल सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि ऊर्जा, डेटा सेंटर, कंप्यूट, नेटवर्क, चिप्स, टैलेंट और एप्लिकेशन से बने व्यापक इन्फ्रास्ट्रक्चर के रूप में देखने की जरूरत बताई। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भारत का डेटा विदेशों में प्रोसेस होगा, तो देश का भविष्य भी बाहरी नियंत्रण में चला जाएगा।
भारत की संभावनाओं पर बात करते हुए अदाणी ने कहा कि देश के पास मैन्युफैक्चरिंग, मोबिलिटी, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल सेवाओं में तेजी से बढ़ती मांग के कारण बड़ा अवसर मौजूद है। उन्होंने कहा कि भारत 500 गीगावॉट से अधिक स्थापित बिजली क्षमता पार कर चुका है और आने वाले वर्षों में एआई आधारित अर्थव्यवस्था के लिए बड़े पैमाने पर ऊर्जा और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी।
उन्होंने एआई से नौकरियां खत्म होने की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि एआई को अवसर पैदा करने वाला उपकरण बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, भारत को ऐसा एआई विकसित करना होगा जो उत्पादकता बढ़ाए, नए उद्योगों को बढ़ावा दे, छोटे उद्यमियों को सशक्त बनाए और युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करे।
अदाणी ने बताया कि उनका समूह ऊर्जा और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जता चुका है। इसमें गुजरात के खावड़ा में 30 गीगावॉट क्षमता वाली दुनिया की सबसे बड़ी सिंगल लोकेशन रिन्यूएबल एनर्जी परियोजना और भारत में सॉवरेन कंप्यूट इकोसिस्टम विकसित करने के लिए तथा के साथ साझेदारी शामिल है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि भविष्य अपने आप नहीं आता, बल्कि उसे बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में ऊर्जा और कंप्यूट के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ही वास्तविक स्वतंत्रता है।
