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महत्वाकांक्षी लक्ष्य
दुनिया में अर्थव्यवस्था को लेकर काफी उतार चढ़ाव देखे जा रहे हैं। भारत को दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए नीति आयोग विजन 2047 मसौदा तैयार कर रहा है। आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीवीआर सुब्रमण्यम के मुताबिक 2047 तक भारत को 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए 25-वर्षीय दृष्टिकोण विकसित करने की कवायद अंतिम दौर में है।
इस दौरान ग्रामीण और कृषि, बुनियादी ढांचे, संसाधन, सामाजिक दृष्टि, कल्याण, वित्त और अर्थव्यवस्था, वाणिज्य और उद्योग, प्रौद्योगिकी, शासन और सुरक्षा तथा विदेशी मामलों पर 10 क्षेत्रीय समूहों का गठन किया गया था। कुल मिलाकर 2047 तक देश को आजाद हुए 100 साल हो जाएंगे।
सामाजिक क्षेत्रों में भारत 2047 तक 90 प्रतिशत साक्षरता दर प्राप्त करना चाहता है, जिसमें 82 प्रतिशत का मध्यम अवधि का लक्ष्य है। 1991 में वैश्विक आर्थिक उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 1.1 प्रतिशत थी, आज यह दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी तक पहुंच गया है। हालांकि इस योजना का ब्योरा तभी सामने आ सकेगा जब यह दस्तावेज सार्वजनिक किया जाएगा, लेकिन यह लक्ष्य निश्चित रूप से महत्वाकांक्षी है।
महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने में कोई दिक्कत नहीं है। क्योंकि उसकी मदद से नीतिगत परिवर्तनों को सही दिशा में आगे ले जाने में मदद मिल सकती है। अंतिम योजना में ऐसे चुनौतीपूर्ण सुधारों को पूरा करने, वैश्विक निवेशकों के लिए नीतिगत निश्चितता सुनिश्चित करने के लिए विचार जरूर होना चाहिए।
लोकसभा चुनाव से पहले, इस योजना को संभावित मतदाताओं के लिए सरकार के नीतिगत वादे के रूप में देखा जा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार करीब 3.73 लाख करोड़ डॉलर रहेगा। ऐसे में उल्लिखित लक्ष्य को हासिल करने के लिए डॉलर के संदर्भ में 2047 तक सालाना 9 फीसद वृद्धि हासिल करनी होगी। 2030 और 2047 के बीच उच्च 9 प्रतिशत विकास दर का लक्ष्य प्रशंसनीय है।
