बिजनेस न्यूज : मोबिक्विक ग्रुप को एनबीएफसी लाइसेंस के लिए आरबीआई से मिली मंजूरी

मुंबई, अप्रैल 2026 : वन मोबिक्विक सिस्टम्स लिमिटेड (मोबिक्विक) ने घोषणा की है कि ग्रुप को नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (एनबीएफसी) लाइसेंस के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से मंजूरी मिल गई है। इसे कंपनी की फाइनेंशियल सर्विसेस को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

इस लाइसेंस के तहत मोबिक्विक अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी मोबिक्विक फाइनेंशियल सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड (एमएफएसपीएल) के माध्यम से नया लेंडिंग डिवीजन शुरू करेगा। इससे रेगुलेटेड लेंडिंग क्षमता बढ़ेगी, नए और इनोवेटिव क्रेडिट प्रोडक्ट्स तैयार किए जा सकेंगे और अधिक ग्राहकों व मर्चेंट्स तक बेहतर सेवाएं पहुंचाई जा सकेंगी।

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कंपनी का कहना है कि यह कदम उसके फुल-स्टैक फिनटेक प्लेटफॉर्म बनने के दीर्घकालिक विजन के अनुरूप है, जिसमें आसान, जिम्मेदार और तकनीक आधारित वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराना लक्ष्य है।

एनबीएफसी, ग्रुप की मौजूदा ताकतों—18.6 करोड़ से अधिक यूजर बेस, मजबूत टेक इंफ्रास्ट्रक्चर, भरोसेमंद ब्रांड, रिस्क अंडरराइटिंग और कलेक्शन क्षमता—पर आधारित होगा। एमएफएसपीएल के जरिए कंज्यूमर्स और एमएसएमई के लिए सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड दोनों तरह के क्रेडिट प्रोडक्ट्स तेजी से लॉन्च किए जा सकेंगे, खासकर उन क्षेत्रों में जहां अभी वित्तीय सेवाओं की पहुंच सीमित है।

हालांकि, एनबीएफसी का पूर्ण संचालन आरबीआई से सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन (सीओआर) मिलने और कुछ आवश्यक शर्तें पूरी होने के बाद शुरू होगा।

मोबिक्विक की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, को-फाउंडर और सीएफओ उपासना टाकू ने कहा, “एनबीएफसी की मंजूरी मिलना हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे हम एक मजबूत फाइनेंशियल सर्विस प्लेटफॉर्म बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। हमें खुशी है कि यह मंजूरी चार महीने से भी कम समय में प्राप्त हुई, जो हमारे ग्रुप की विश्वसनीयता को दर्शाती है।”

उन्होंने कहा, “इससे हमें अपने क्रेडिट प्रोडक्ट्स को और बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा, साथ ही मजबूत गवर्नेंस और रिस्क मैनेजमेंट बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। हमारा उद्देश्य जिम्मेदारी के साथ लोगों की जरूरतों को पूरा करना और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना है।”

कंपनी अपनी तकनीक, एआई-एमएल मॉडल्स और बड़े यूजर बेस का उपयोग कर ग्राहकों की जरूरतों के अनुसार फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराएगी। विशेष फोकस टियर-2 और टियर-3 शहरों पर रहेगा, हालांकि सेवाएं पूरे देश में दी जाएंगी।

इस रणनीति का उद्देश्य उन क्षेत्रों तक वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाना है, जहां अभी यह सीमित है, ताकि लोगों को बेहतर और आसान क्रेडिट सुविधा मिल सके।

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