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Gorakhpur News: गोरखनाथ मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब: सीएम योगी ने गुरु गोरखनाथ को अर्पित की आस्था की खिचड़ी
गोरखपुर। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को ब्रह्म मुहूर्त में प्रातः चार बजे गोरखनाथ मंदिर में नाथपंथ की परंपरा के अनुसार महायोगी गुरु गोरखनाथ को विधि-विधान से आस्था की पवित्र खिचड़ी अर्पित की। इस दौरान उन्होंने शिवावतार महायोगी से लोकमंगल और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्ध जीवन की कामना की।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रयागराज में भी मकर संक्रांति के अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं ने संगम में पवित्र डुबकी लगाई है और यह क्रम गुरुवार को भी जारी है। गोरखपुर में भगवान गोरखनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने के लिए लाखों भक्त पंक्तिबद्ध होकर खिचड़ी अर्पित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि मंदिर की विशिष्ट पूजा संपन्न होने के बाद उन्हें स्वयं भी भगवान गोरखनाथ को खिचड़ी अर्पित करने का अवसर मिला।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि मकर संक्रांति भारतीय पर्व-परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण त्योहार है। सूर्यदेव को जगत की आत्मा बताते हुए उन्होंने कहा कि सूर्य उपासना का यह पर्व हर प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। मकर संक्रांति के बाद सनातन परंपरा में सभी मांगलिक कार्यों का शुभारंभ हो जाता है।
उन्होंने ज्योतिषीय परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया कि सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश को संक्रांति कहा जाता है। जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे मकर संक्रांति कहा जाता है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं और अगले छह माह तक दिन बड़े तथा रातें छोटी रहती हैं। यह पर्व सूर्य के प्रकाश और ऊर्जा के महत्व को दर्शाता है, जिसे भारत की ऋषि परंपरा ने विशेष स्थान दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मकर संक्रांति देश के हर कोने में अलग-अलग नाम और रूप में मनाई जाती है—पूर्व भारत में बिहू या तिलवा संक्रांति, पश्चिम में लोहड़ी, दक्षिण में पोंगल और उत्तर भारत में खिचड़ी संक्रांति के रूप में। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए सभी के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त कीं।
उन्होंने कहा कि जहां एक ओर गोरखपुर में लाखों श्रद्धालु बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी अर्पित कर रहे हैं, वहीं प्रयागराज में कल्पवासी और संतजन भगवान वेणीमाधव, प्रयागराज और गंगा-यमुना-सरस्वती के सान्निध्य में संगम में पवित्र स्नान कर साधना में लीन हैं। मुख्यमंत्री ने इस पावन अवसर को आस्था, एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
