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बांदा में ‘आशिकों का मेला’ संपन्न: नटबली मंदिर में प्रेमी-प्रेमिकाओं ने टेका माथा, जानिए धार्मिक मान्यता
बांदा। मकर संक्रांति के अवसर पर बांदा के भूरागढ़ दुर्ग क्षेत्र में आयोजित दो दिवसीय प्रसिद्ध ‘आशिकों का मेला’ गुरुवार को संपन्न हो गया। बुधवार और गुरुवार को चले इस मेले में उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश के निकटवर्ती जिलों से हजारों श्रद्धालु और प्रेमी-प्रेमिकाएं पहुंचे। बड़ी संख्या में लोगों ने नटबली मंदिर में पूजा-अर्चना कर मन्नतें मांगीं।
क्या है धार्मिक मान्यता
इतिहासकारों की अलग राय
हालांकि इतिहासकार इस कथा से असहमति जताते हैं। उनके अनुसार 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भूरागढ़ दुर्ग में अंग्रेजों द्वारा करीब 3,300 स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी गई थी, जिनमें नट समाज के लगभग 800 देशभक्त शामिल थे। नट समाज के शहीदों की संख्या अधिक होने के कारण उनकी स्मृति में नटबली मंदिर की स्थापना हुई और तभी से इस ऐतिहासिक मेले का आयोजन होता आ रहा है।
मेले की रौनक और व्यवस्थाएं
मेले के दौरान केन नदी तट पर श्रद्धालुओं ने स्नान किया, सूर्य देव को अर्घ्य दिया और पूजा-अर्चना की। नदी किनारे पिकनिक, सेल्फी और नौका विहार का आनंद लिया गया। भूरागढ़ गांव में विशाल दंगल का आयोजन भी हुआ। मंदिर में पूजा के साथ शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सजी-धजी दुकानों पर जमकर खरीदारी हुई।
जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। रेलवे लाइन और मेला क्षेत्र में विशेष सुरक्षा, घाटों पर नाव व गोताखोरों की व्यवस्था, महिलाओं के लिए कपड़े बदलने हेतु पंडाल, तथा यातायात प्रबंधन सहित सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की गईं।
