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शतक ट्रेलर लॉन्च: संघ के 100 वर्षों की अनकही कहानी, मिथकों और इतिहास पर एक नई रोशनी
मुंबई, जनवरी 2026 : भारत के सबसे ज्यादा चर्चित और बहस के केंद्र में रहने वाले संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर बनी बहुप्रतीक्षित फिल्म शतक: संघ के 100 वर्ष का ट्रेलर आज मुंबई में भव्य रूप से लॉन्च किया गया। यह ट्रेलर संघ के वरिष्ठ प्रचारक और अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सदस्य डॉ. मनमोहन जी वैद्य द्वारा कई विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी में जारी किया गया। यह आयोजन संघ के शताब्दी वर्ष में एक अहम् क्षण के रूप में देखा जा रहा है।
साल 2025 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने 100 वर्ष पूरे किए जो एक ऐसा सफर है, जिसने भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक परिदृश्य को गहराई से प्रभावित किया है। शतक इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में खड़ी होकर केवल धारणाओं पर आधारित चर्चाओं से आगे बढ़ते हुए इतिहास, विचार और संगठनात्मक विकास की एक संतुलित और गहन समझ प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।
फिल्म का ट्रेलर संघ से जुड़े कई वर्षों पुराने मिथकों और भ्रांतियों को चुनौती देने का संकेत देता है। इसमें उन ऐतिहासिक पहलुओं को सामने लाने की कोशिश की गई है, जिन पर अब तक शायद ही कभी परदे पर बात हुई हो। अलग-अलग दौर में संघ पर लगे प्रतिबंध, स्वतंत्रता संग्राम के समय की भूमिका और आपातकाल जैसे संवेदनशील लेकिन महत्वपूर्ण दौर, इन सबको संदर्भ के साथ प्रस्तुत करने का वादा ट्रेलर में साफ झलकता है।
डॉ. मनमोहन जी वैद्य की मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को खास महत्व दिया। उनके द्वारा ट्रेलर लॉन्च किया जाना यह दिखाता है कि फिल्म अपने उद्देश्य को लेकर गंभीर है और तथ्यों व सच्चाई से जुड़ी रहने की पूरी कोशिश करती है।
फिल्म का निर्माण वीर कपूर ने किया है, इसके सह-निर्माता हैं आशीष तिवारी और इसे प्रस्तुत आदा 360 डिग्री एलएलपी ने किया है। शतक संघ के उन अनकहे पहलुओं को सामने लाने का प्रयास है, जिन्होंने संगठन की पहचान को आकार दिया। यह ट्रेलर इतिहास और यादों से जुड़ी कहानी की झलक दिखाता है और दर्शकों को जानी-पहचानी सुर्खियों से आगे जाकर सोचने और देखने के लिए आमंत्रित करता है।
फिल्म की पहल और उसके पीछे की सोच पर बात करते हुए डॉ. मनमोहन जी वैद्य ने कहा,
“यह अत्यंत प्रसन्नता की बात है कि फिल्म शतक के माध्यम से संघ से जुड़ी जानकारी समाज तक इतने प्रभावशाली माध्यम से पहुँचेगी। एक सामाजिक चिंतक ने कहा था कि 1875 से 1950 के बीच भारत में शुरू हुए सभी आंदोलनों में से केवल संघ ही ऐसा रहा, जो बिना टूटे निरंतर आगे बढ़ता रहा। यही निरंतरता, विस्तार और प्रासंगिकता उसकी सबसे बड़ी ताकत है। फिल्म की टैगलाइन ‘ना रुके, ना थके, ना झुके’ इसी भावना को दर्शाता है। इस पूरी यात्रा की मजबूत जड़ रहे संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार की दूरदृष्टि। सिनेमा दिल और दिमाग दोनों को छूने की क्षमता रखता है और इस माध्यम से संघ की कहानी कहने का प्रयास बहुत सराहनीय है।”
फिल्म के निर्देशक आशीष मॉल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “यह फिल्म मेरे लिए बहुत व्यक्तिगत है। मेरा मानना है कि कुछ कहानियाँ आपको चुनती हैं और शतक ने मुझे चुना। शोध और मार्गदर्शन के महीनों के दौरान, राजनीतिक समझ रखने के बावजूद, मुझे संघ से जुड़े कई नए पहलू जानने को मिले। हमें महसूस हुआ कि समाज में कितनी गलतफहमियाँ और अफवाहें फैली हुई हैं। उन्हें ईमानदारी से सामने लाना ज़रूरी था। यह फिल्म एक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जिसका निर्णय हम दर्शकों पर छोड़ते हैं।”
निर्माता वीर कपूर ने कहा, “रचनाकार और विचारक हमेशा रहे हैं, आज भी हैं और आगे भी पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे। हमारे लेखकों ने पुस्तकों और उपलब्ध साहित्य से आधार लेकर इस फिल्म की कहानी गढ़ी है। हमने इन विचारों को मोतियों की तरह एक धागे में पिरोकर सिनेमाई रूप देने की कोशिश की है। यह फिल्म उसी सामूहिक प्रयास का परिणाम है।”
शानदार दृश्यों, प्रभावशाली संगीत और सशक्त कहानी के साथ शतक भारतीय सिनेमा में एक ऐसा विषय लेकर आ रही है, जिस पर अब तक बहुत कम फिल्मों ने कदम रखा है।
अनिल डी अग्रवाल की परिकल्पना पर आधारित और आशीष मॉल द्वारा निर्देशित यह फिल्म 19 फरवरी, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। ट्रेलर एक ऐसे विचार की ओर इशारा करता है, जो सौ वर्षों से चला आ रहा है और आज भी समकालीन भारत को प्रभावित कर रहा है।
