- Hindi News
- भारत
- भारतीय वायुसेना के अगली पीढ़ी के एयरबोर्न सर्विलांस सिस्टम के लिए अदाणी डिफेंस-डीआरडीओ की साझेदारी
भारतीय वायुसेना के अगली पीढ़ी के एयरबोर्न सर्विलांस सिस्टम के लिए अदाणी डिफेंस-डीआरडीओ की साझेदारी
नई दिल्ली। अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के लिए अगली पीढ़ी के एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C-MKII) कार्यक्रम पर ऐतिहासिक समझौता किया है। यह साझेदारी आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
डीआरडीओ की रक्षा अनुसंधान और मिशन सिस्टम विशेषज्ञता तथा अदाणी डिफेंस की एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, सिस्टम इंटीग्रेशन और लाइफसाइकल सपोर्ट क्षमताओं के मेल से यह स्वदेशी एयरबोर्न सर्विलांस प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा।
वायुसेना की 'आसमान की आंखें' बनेगा AEW&C-MKII
AEW&C विमानों को आधुनिक हवाई युद्ध में "आसमान की आंखें" कहा जाता है। ये लंबी दूरी तक निगरानी, संभावित खतरों का शुरुआती स्तर पर पता लगाने और रियल-टाइम कमांड एवं कंट्रोल की सुविधा प्रदान करते हैं। इससे युद्ध के दौरान तेज और सटीक रणनीतिक निर्णय लेने में मदद मिलती है।
AEW&C-MKII के शामिल होने से भारतीय वायुसेना की सिचुएशनल अवेयरनेस, फोर्स कोऑर्डिनेशन और नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशंस की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
निजी क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि
इस परियोजना के साथ अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस भारत की पहली निजी कंपनी बन गई है, जिसे इस स्तर और जटिलता वाले एयरबोर्न मिशन प्लेटफॉर्म के विकास, एकीकरण और लाइफसाइकल सपोर्ट की जिम्मेदारी मिली है।
चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल होगा भारत
वर्तमान में केवल अमेरिका, फ्रांस, इज़राइल, चीन और स्वीडन के पास स्वदेशी AEW&C क्षमता है। AEW&C-MKII के विकसित होने के बाद भारत भी इस विशिष्ट समूह में शामिल हो जाएगा।
यह प्लेटफॉर्म भारतीय वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) से जुड़ा होगा, जिससे देशभर में वायु निगरानी, वायु रक्षा और ऑपरेशनल संसाधनों का रियल-टाइम समन्वय संभव होगा। इससे भारत की वायु रक्षा प्रणाली और अधिक मजबूत तथा प्रभावी बनेगी।
