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स्वतंत्रता दिवस पर सोनी सब के कलाकारों ने साझा किए आजादी और जिम्मेदारी के मायने
मुंबई, अगस्त 2026: स्वतंत्रता दिवस देश के लिए गर्व, उत्सव और उन बलिदानों को याद करने का अवसर है, जिनकी बदौलत भारत ने आजादी हासिल की। इसी मौके पर सोनी सब के कलाकारों मनीष वाधवा, गुलकी जोशी, तोरल रसपुत्रा, करुणा पांडे, इक़बाल खान और समृद्ध बावा ने बताया कि उनके लिए स्वतंत्रता का असली अर्थ क्या है और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में देश को मजबूत बनाने में हर व्यक्ति कैसे योगदान दे सकता है।
इक़बाल खान, जो यादें में डॉक्टर देव मेहता की भूमिका निभा रहे हैं, ने कहा कि उनके लिए देशप्रेम रोजमर्रा के छोटे-छोटे फैसलों में दिखाई देता है। साफ-सफाई रखना, सभी के साथ समानता और दयालुता से व्यवहार करना तथा जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद करना जिम्मेदार नागरिक होने का हिस्सा है।
तोरल रसपुत्रा, जो हस्तिनापुर के वीर में कुंती का किरदार निभा रही हैं, ने स्वतंत्रता को अपने मूल्यों के साथ आत्मविश्वास से जीवन जीने से जोड़ा। उनके मुताबिक सच्ची आजादी तब होगी, जब हर महिला खुद को सुरक्षित, सम्मानित और अपने फैसले लेने के लिए पूरी तरह सक्षम महसूस करेगी।
मनीष वाधवा, जो हस्तिनापुर के वीर में भीष्म पितामह की भूमिका निभा रहे हैं, ने स्वतंत्रता दिवस को उन लोगों के बलिदान को याद करने का अवसर बताया, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर किया। उन्होंने कहा कि सच्ची देशभक्ति एक-दूसरे का सम्मान करने, अपने मूल्यों को संजोने और देश के लिए अपनी ओर से योगदान देने में है।
करुणा पांडे, जो पुष्पा इम्पॉसिबल में पुष्पा की भूमिका निभा रही हैं, ने ध्वजारोहण और राष्ट्रगान को स्वतंत्रता दिवस की अपनी खास यादों से जोड़ा। उन्होंने कहा कि अपने सपनों को आगे बढ़ाने और स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने की आजादी के लिए आभारी होना चाहिए तथा दयालुता और जिम्मेदारी के साथ इस आजादी का सम्मान करना चाहिए।
गुलकी जोशी, जो यादें में डॉक्टर सृष्टि अग्रवाल का किरदार निभा रही हैं, ने कहा कि स्वतंत्रता सिर्फ अपनी आवाज उठाने तक सीमित नहीं है, बल्कि दूसरों को भी अपनी बात रखने, अपनी पहचान के साथ स्वीकार किए जाने और अपने सपनों को पूरा करने की जगह देने का नाम है।
वहीं समृद्ध बावा, जो पुष्पा इम्पॉसिबल में अश्विन की भूमिका निभा रहे हैं, ने बचपन के स्वतंत्रता दिवस की यादों को साझा करते हुए कहा कि आज वे समझते हैं कि आजादी केवल उत्सव नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। उनके मुताबिक भारत की विविध संस्कृतियों और परंपराओं के बावजूद एकजुट रहना ही देश की असली ताकत है।
सोनी सब के यादें, हस्तिनापुर के वीर और पुष्पा इम्पॉसिबल से जुड़े रहिए और इन कलाकारों की कहानियों का आनंद लीजिए।
