भारत पर भरोसा

आर्थिक और राजनीतिक शक्ति के रूप में ग्लोबल साउथ के उदय ने पारंपरिक शक्ति की गतिशीलता को चुनौती दी है और बदलती वैश्विक व्यवस्था की ओर ध्यान आकर्षित किया है। विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि ग्लोबल साउथ के देश कई मुद्दों पर एक-दूसरे के प्रति सहानुभूति रखते हैं।

‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है। ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में स्थित हैं। आमतौर पर ग्लोबल नार्थ के धनी देशों की तुलना में इन देशों में उच्च स्तर की गरीबी,आय असमानता और जीवन स्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं।

टोक्यो में भारत-जापान साझेदारी पर ‘निक्कई फोरम’ को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा आजादी मिलने के तुंरत बाद हमने आक्रमण देखा, हमारी सीमाओं में बदलाव की कोशिश हुई और आज भी भारत के कुछ हिस्सों पर एक अन्य देश का कब्जा है,लेकिन हमने इस पर दुनिया को यह कहते नहीं देखा कि चलो हम सभी भारत का साथ दें,परंतु अब परिस्थितियां बदली हैं। 

ग्लोबल साउथ में हाल के दशकों में धन और राजनीतिक परिस्थितियों में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। ग्लोबल साउथ के राजनेता तेजी से वैश्विक मामलों में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं। यानी ग्लोबल साउथ ने स्वयं को मजबूत करना जारी रखा है,यह भू-राजनीति को नया आकार देता है, एक नए युग की शुरुआत करता है। अनुमानों से संकेत मिलता है कि वर्ष 2030 तक चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से तीन ग्लोबल साउथ के होंगे।

गौरतलब है कि ग्लोबल साउथ का प्रभाव ग्लोबल नॉर्थ के ऐतिहासिक प्रभुत्व को चुनौती देता है। ये बदलाव विश्व मंच पर ग्लोबल साउथ की बढ़ती मुखरता और प्रभाव को दर्शाते हैं। इसमें भारत का अपना सामरिक महत्व है रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते खाद्य पदार्थों,उर्वरकों की कीमतें बढ़ गई हैं और श्रीलंका जैसे देश में इतना बड़ा आर्थिक संकट पैदा हुआ। श्रीलंका को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का पैकेज काफी देर बाद मिला जबकि भारत ने कुछ सप्ताह के भीतर एक पैकेज दिया।

आईएमएफ का पैकेज तीन अरब डॉलर का था,जबकि हमने श्रीलंका को आईएमएफ के मुकाबले 50 फीसदी अधिक पैकेज दिया। उल्लेखनीय है कि भारत एक बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते अपने दायित्व को समझता है और ग्लोबल साउथ की जिम्मेदारी को बहुत गंभीरता से लेता है।

महत्वपूर्ण है कि इस मंच के 125 देशों ने भारत पर अपना विश्वास जताया है। जबकि चीन उनकी चिंताओं पर ध्यान तक नहीं देता। ग्लोबल साउथ की बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक शक्ति का वैश्विक भू-राजनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव है और  भारत ग्लोबल साउथ में बड़ी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार है।

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