हादसों से सबक

बीते मंगलवार को उत्तरकाशी के सिलक्यारा में धंसी सुरंग में 17 दिन से फंसे मजदूरों को लंबी जद्दोजहद के बाद सकुशल बाहर निकाल लिया गया। इस दौरान अनेक बार असफलताओं से भी दो-चार होना पड़ा। कई बार ऐसा लगने लगा कि रेस्क्यू ऑपरेशन फेल न हो जाए और हमारे लोग अंदर ही फंसे न रह जाए। इस दौरान आधुनिक मशीनों से लेकर मानवीय कौशल तक का सहारा लिया गया।

अंतत: रेस्क्यू टीम की मेहनत रंग लाई और आज सुखद परिणाम देश के सामने है। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में पहले दिन से ही न केवल राज्य के मुख्यमंत्री और आला अफसर लगे रहे, बल्कि पीएमओ की टीम भी मौके पर कैंप में डेरा डाले रही और मजदूरों को बचाने में हर स्तर की मदद भी करती रही। यह बात कहने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि केंद्र सरकार देश में होने वाली किसी भी दुर्घटना को तुरंत संज्ञान लेते हुए मदद के सभी प्रयास तत्काल से युद्ध स्तर पर शुरु कर देती है।

इसकी बानगी देखी जा सकती है कि जून महीने में उड़ीसा के बालासोर में हुई रेल दुर्घटना के रेस्क्यू में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव रेल यातायात बहाल होने तक घटना स्थल पर बने रहे। इन सब वाकयों से न केवल सरकार पर भरोसा कायम होता है, बल्कि सरकार के नुमाइंदों को देश की जनता की कितनी फ्रिक है, वह भी दर्शाती है।

यह बात सुखद व सुकुन देने वाली है कि सरकार और सेना की तत्परता से टनल में फंसे लोगों को बचा लिया गया है, लेकिन अब सवाल उठता है कि आए दिन पहाड़ों पर होने वाली इस तरह की घटनाओं से हम क्या सबक ले रहें हैं? पहाड़ों पर बार-बार होने वाली इस तरह की घटनाओं से प्रदर्शित होता है कि हमको इस दिशा में गंभीरता से सोचते हुए प्रयास शुरू करने होंगे। साथ ही हमको इस प्रवृत्ति से भी बचना होगा कि जब तक कोई भयानक हादसा नहीं हो जाता, तब तक जरूरी सावधानी बरतने को प्राथमिकता नहीं दी जाती है।

पहाड़ी इलाकों में चौड़ी सड़कों और सुरंगों के सहारे एक से दूसरी जगह की यात्रा को आसान बनाने के दावे किए जाते हैं, वहां अगर भूस्खलन या जमीन में दरार पड़ने जैसी घटनाएं सामने आती हैं तो इसका मतलब यही है कि निर्माण कार्यों के दौरान पहाड़ की चट्टानों, मिट्टी की प्रकृति और उसकी पकड़ का सटीक आंकलन नहीं किया जा सका है। गौरतलब है कि हिमालय को भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता रहा है।

अगर इस तरह के जोखिम के बीच विकास कार्य किए जाते हैं तो हादसों की आशंका लगातार बनी रहती है। अत: बार-बार होने वाले हादसों से सबक लेते हुए हमारी सरकारों और विकास संबंधी एंजेसियों को भी क्षेत्र की स्थिति का संपूर्ण आंकलन के बाद ही वहां पर रोड या अन्य विकास कार्यों को शुरू करना चाहिए।

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