लखनऊ: कैंसर संस्थान में गुड क्लीनिकल प्रैक्टिस पर हुई कार्यशाला

लखनऊ। कल्याण सिंह कैंसर संस्थान में शोध क्षेत्र के बढावा के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। बुधवार को इस कार्यशाला में लखनऊ के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों केएसएससीआई, एसजीपीजीआईएमएस, केजीएमयू, इंटीग्रल यूनिवर्सिटी और टीएस मिश्रा मेडिकल कॉलेज सहित संस्थानों प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। साथ ही मुंबई और बेंगलुरु से रोश फार्मा के विशेषज्ञों ने भी भाग लिया। कार्यशाला में नैतिक तरीके से शोध करने के तरीकों पर चर्चा की गई।

वहीं केएसएसएससीआई के निदेशक प्रो आरके धीमान ने बताया कि अनुसंधान चिकित्सा विज्ञान सहित विज्ञान का एक अभिन्न अंग है और अनुसंधान को नैतिक रूप से संचालित करना प्रत्येक चिकित्सक, शिक्षाविद और शोधकर्ता का कर्तव्य है। उन्होंने यह भी बताया कि संस्थागत आचार समिति की यह सुनिश्चित करने की बहुत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि संस्थागत स्तर पर दिशानिर्देशो और अच्छी नैदानिक प्रथाओं का पालन किया जा रहा है।
 
उन्होंने कार्यशाला के आयोजन के लिए पूरी टीम को बधाई दी और कामना की कि भविष्य में भी इस तरह की कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इसी क्रम में आईईसी के अध्यक्ष डॉ. चंदीश्वर नाथ ने कहा कि प्रतिभागियों के अधिकारों को सुनिश्चित करना नैतिक अनुसंधान का अभिन्न अंग है।
 
उन्होंने एनडीसीटी नियम 2019 (नई दवाएं और नैदानिक परीक्षण) के महत्व के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि इन नियमों में क्लीनिकल ट्रायल में नैतिक शोध के लिए दिशानिर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी चर्चा की कि आईईसी के प्रत्येक व्यक्ति को अध्यक्ष, चिकित्सक, सामान्य व्यक्ति, सामाजिक वैज्ञानिक सहित नैतिक अनुसंधान में भूमिका निभानी है। केएसएसएससीआई के आईईसी के सदस्य सचिव डॉ. आयुष लोहिया ने इस अवसर पर बताया कि मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए नैतिक तरीके से अनुसंधान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्यशाला भाग लेने वाले शोधकर्ताओं के बीच बेहतर अनुसंधान और ज्ञान के आदान-प्रदान का मार्ग प्रशस्त करेगी।
 

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