Kanpur: चैत्र नवरात्र पर बन रहा अतिदुर्लभ संयोग, सुख-समृद्धि के लिए इन योगों में करें पूजा, ऐसे करें माता को प्रसन्न

कानपुर। रेवती व अश्विनी नक्षत्र और सर्वार्थ व अमृत सिद्धि योग का शुभ संयोग इस बार नवरात्र में रहेगा। कई सालों बाद बन रहे अतिदुर्लभ संयोगों के कारण नवरात्र सुख-समृद्धि के मार्ग खोलेगा। चैत्र नवरात्र इस बार पूरे नौ दिन का होगा। नौ अप्रैल मंगलवार को कलश स्थापना के साथ नवरात्र शुरू होगा। 17 अप्रैल को रामनवमी उत्सव से नवरात्र का समापन होगा।  

पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि नौ अप्रैल को कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 05. 52 से लेकर 10.04 बजे तक है। इसके बाद 11. 45 से लेकर 12.35 बजे तक अभिजीत मुहूर्त मिलेगा। इन दोनों मुहूर्त में घटस्थापना कर सकते हैं, जो अत्यंत फलदायी होगा। उन्होंने बताया कि चैत्र नवरात्र के पहले दिन यानी प्रतिपदा तिथि पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। 

अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 07.32 बजे से प्रारंभ होगा और यह अगले दिन 10 अप्रैल को सुबह 05.06 बजे तक रहेगा। नवरात्र के पहले दिन रेवती नक्षत्र सुबह 07.32 बजे तक रहेगा। उसके बाद अश्विनी नक्षत्र सुबह 07.32 से लेकर अगले दिन 10 अप्रैल को सुबह 05.06 बजे तक रहेगा। इन योगों में मां दुर्गा की पूजा करने से साधक को अनंत सुखद फल की प्राप्ति होगी।

माता को प्रसन्न करने के लिए क्या करें 

ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ स्वास्तिक बनाएं। दरवाजे पर आम के पत्ते का तोरण बांधें। क्योंकि माता इस दिन अपने भक्तों के घर पहुंचती हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं और आपके घर में निवास करती हैं। नवरात्र में माता की मूर्ति लकड़ी की चौकी या आसन पर स्थापित करना चाहिए। 

जहां मूर्ति स्थापित करें, वहां पहले स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। उसके बाद रोली और अक्षत से टीका करें। उसके बाद माता की मूर्ति स्थापित करें। इन सबके बाद विधिविधान से माता की पूजा करनी चाहिए। वास्तुशास्त्र के अनुसार, उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण पूजा के लिए सर्वोत्तम स्थान होता है। इसी दिशा में कलश की स्थापना और चौकी सजानी चाहिए।

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