Ballia News: बाल विवाह रोकथाम में नव भारतीय नारी विकास समिति की अनोखी पहल, धर्मगुरुओं के सहयोग से चला जागरूकता अभियान

बलिया, उत्तर प्रदेश: जिले में बाल अधिकारों की सुरक्षा और बाल विवाह की रोकथाम के लिए नव भारतीय नारी विकास समिति, बहेरी ने एक अनूठी पहल की है। समिति ने विभिन्न धर्मों के पुरोहितों, मौलवियों और पादरियों के बीच जागरूकता अभियान चलाकर बाल विवाह के खिलाफ समर्थन जुटाया है। संगठन के सचिव अजहर अली ने बताया कि इस अभियान को धर्मगुरुओं का अभूतपूर्व सहयोग मिला है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि इस अक्षय तृतीया पर जिले में एक भी बाल विवाह नहीं होगा।

यह अभियान देश के नागरिक समाज संगठनों के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (JRC) के तहत चल रहे 'चाइल्ड मैरिज फ्री इंडिया' अभियान का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बनाना है। बलिया में JRC के सहयोगी संगठन के रूप में कार्य कर रही नव भारतीय नारी विकास समिति ने विवाह के मौसम को देखते हुए यह पहल की है।

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अजहर अली ने बताया कि चूंकि कोई भी विवाह धार्मिक विधि के बिना पूरा नहीं होता, इसलिए इस अभियान में धर्मगुरुओं की भागीदारी जरूरी थी। इस विचार के साथ समिति ने जिले के सभी प्रमुख मंदिरों और मस्जिदों में ऐसे बोर्ड लगाए हैं, जिन पर साफ लिखा है: "यहां बाल विवाह की अनुमति नहीं है।"

उन्होंने यह भी बताया कि अभी भी बहुत से लोगों को यह जानकारी नहीं है कि बाल विवाह निषेध अधिनियम (PCMA) 2006 के अनुसार बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है। इसमें किसी भी प्रकार से शामिल होने या सहयोग करने पर दो साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।

समिति का मानना है कि जन-जागरूकता और धार्मिक समुदाय के समर्थन से जल्द ही बाल विवाह मुक्त भारत का सपना साकार हो सकेगा।

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