मध्यप्रदेश के प्रखर विश्वकर्मा ने बनाई रियूजेबल मिसाइल, IIT-BHU इनोवेशन हब से जोड़ना चाहते हैं प्रोजेक्ट

भोपाल/वाराणसी : मध्यप्रदेश के पलेरा कस्बे से निकलकर विज्ञान के क्षेत्र में क्रांति लाने की दिशा में बढ़ रहे युवा वैज्ञानिक प्रखर विश्वकर्मा ने एक अनोखी मिसाइल तकनीक विकसित की है, जो भारत की रक्षा प्रणाली को नई दिशा दे सकती है। उन्होंने “रिलॉन्च ऑटोमैटिक मिसाइल” (Project RAM) नामक एक रियूजेबल मिसाइल सिस्टम तैयार किया है, जो न केवल लक्ष्य पर हमला करती है बल्कि मिशन के बाद अपने लॉन्चपैड पर स्वतः लौटने में भी सक्षम है।

इस अत्याधुनिक मिसाइल में डबल इंजन और डबल स्टेज तकनीक का उपयोग किया गया है। यह जेट और मिसाइल तकनीक का संयोजन है, जो ऑटोपायलट कंट्रोल सिस्टम पर आधारित है। यानी यह बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के युद्ध के दौरान उच्च स्तरीय ऑपरेशन को अंजाम दे सकती है। सबसे खास बात यह है कि यह मिसाइल कम लागत में बार-बार उपयोग में लाई जा सकती है, जिससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा।

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प्रखर का कहना है कि वे इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए IIT-BHU के इनोवेशन हब के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। उन्हें विश्वास है कि IIT-BHU को DRDO और ISRO जैसे संस्थानों के साथ कार्य का अनुभव है, जिससे उनके इनोवेशन को वैज्ञानिक दिशा और मजबूती मिल सकती है।

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प्रखर का वैज्ञानिक सफर कम उम्र में ही शुरू हो गया था। उन्हें वर्ष 2020 में NASA का "साइंटिस्ट फॉर ए डे" अवॉर्ड मिल चुका है। इसके अलावा, ISRO की आदित्य-एल1 क्विज में सहभागिता, चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग में उपस्थिति, और जर्मनी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्पेस एक्सपो के लिए आमंत्रण जैसे महत्वपूर्ण अनुभव उनके खाते में दर्ज हैं। उन्होंने अपने इनोवेशन को नेहरू विज्ञान केंद्र (मुंबई), बिरला म्यूजियम (कोलकाता) और विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में भी प्रस्तुत किया है।

प्रखर विश्वकर्मा का सपना है कि भारत सरकार, IIT-BHU, DRDO और ISRO उनके प्रोजेक्ट को तकनीकी और संस्थागत समर्थन दें ताकि यह अभिनव मिसाइल प्रणाली प्रयोग से आगे बढ़कर भारत की सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा बन सके। एक छोटे से गांव से निकलकर बड़ी उड़ान भरने वाले प्रखर आज देश के युवाओं के लिए प्रेरणा हैं और आने वाले समय में भारत के रक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान में उनका योगदान मील का पत्थ

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