कदाचार रोकने के लिए

सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कदाचार को रोकने के लिए केंद्र ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक 2024, लोकसभा में सोमवार को पेश किया गया। इसमें प्रश्नपत्र लीक करना, अभ्यर्थियों की सहायता करना, कंप्यूटर सिस्टम से छेड़छाड़ करना, फर्जी वेबसाइट बनाना और बैठने की व्यवस्था में हेरफेर करना शामिल है। विधेयक में न्यूनतम तीन साल की सजा और एक करोड़ रुपये तक जुर्माना का प्रावधान किया गया है।

परीक्षा आयोजित करने में लगे सेवा प्रदाताओं पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है और उन्हें भविष्य में जिम्मेदारियों से रोका जा सकता है। बजट सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा था कि सरकार युवाओं को लेकर चिंतित है, जिस तरह से परीक्षाओं में अनियमितता हो रही है उसे सरकार गंभीरता से ले रही है।

लिहाजा फैसला लिया गया है कि परीक्षा में धांधली को रोकने के लिए नया कानून बनाया जाए। विधेयक में सार्वजनिक परीक्षाओं पर एक उच्च-स्तरीय राष्ट्रीय तकनीकी समिति की स्थापना की भी परिकल्पना की गई है, जो डिजिटल प्लेटफार्मों को सुरक्षित करने, फुल प्रूफ आईटी सुरक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी लागू करने और बुनियादी ढांचे के लिए राष्ट्रीय मानक तैयार करने के लिए प्रोटोकॉल विकसित करेगी।

गत वर्षों में भारत में पेपर लीक की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं, जिससे परीक्षा को रद करना पड़ता है और छात्रों के भविष्य पर गहरा असर पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 2017-2023 तक सात सालों में अलग-अलग राज्यों में पेपर लीक के 70 से ज्यादा मामले सामने आए और 1.5 करोड़ से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं। सख्त कानून न होने से इस पर रोक नहीं लग पा रही। ऐसे में इस तरह का कानून बहुत जरूरी था।

प्रतियोगी परीक्षाओं में जैसे-जैसे कदाचार हाईटेक होता जा रहा है दिन-रात मेहनत करने वाले मेधावी बच्चों को मानसिक आघात लग रहा है, वहीं कार्यशैली को लेकर पूरा सिस्टम भी कठघरे में खड़ा हो रहा है। प्रत्येक नौकरी का पहला चरण प्रतियोगी परीक्षा होता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता विश्वास पर टिकी होती है।

परंतु सवाल है कि क्या दुनियाभर में सम्मान पाने वाले भारतीय युवा परीक्षाओं में होने वाली धांधलियों के चलते अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर अपेक्षित सम्मान हासिल कर पाएंगे? शिक्षा भले ही समवर्ती सूची का विषय हो और अलग-अलग राज्यों में परीक्षा में कदाचार को लेकर कानून हों लेकिन यदि उससे पूरे देश में व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हों तो केंद्र सरकार हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठ सकती। विधेयक आने से परीक्षाओं की शुचिता पर विश्वास बहाल होगा।

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