हल्द्वानी: अनुभवी कोच पर भारी पड़ सकता है अनुभवहीन कोच

हल्द्वानी: हर क्षेत्र में अनुभव को बड़ी पूंजी माना जाता है लेकिन खेल विभाग को कोच के अनुभव से कोई लेना-देना नहीं है। जिला खेल विभाग में इन दिनों अलग-अलग स्पर्धाओं के लिए अनुबंध के आधार पर कोच की भर्ती की जा रही है, जिसमें उनकी शैक्षिक, शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य आदि का परीक्षण करके उन्हें नंबर दिए जाते हैं लेकिन इसमें कोच के अनुभव को नजरअंदाज करके उन्हें कोई नंबर नहीं दिए जाते हैं।

खेल विभाग के इस नियम से अनुभवी कोचों में भारी रोष है। उनका कहना है कि विभाग में कई कोच 15-20 सालों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं लेकिन इसके बावजूद नियुक्ति के समय उनके अनुभव को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

कोचों ने बताया कि साक्षात्कार में अलग-अलग चीजों के लिए आवेदकों को नंबर दिए जाते हैं व जिसके नंबर ज्यादा होते हैं, उन्हें नियुक्त कर लिया जाता है। उन्होंने बताया कि एक आवेदक ने नेशनल खेला, सेकंड डिवीजन में इंटरमीडिएट किया व उसके पास कोचिंग का अनुभव हो लेकिन नेशनल खेला, फर्स्ट डिवीजन में इंटरमीडिएट किए गए व्यक्ति को चुन लिया जाता है, भले ही वह अनुभवहीन हो। उन्होंने कहा कि खेल के मैदान में किताबी ज्ञान नहीं बल्कि अनुभव भारी पड़ता है लेकिन अपने चहेतों को नियुक्त करने के लिए चयन में ऐसे कमजोर नियम रखे जाते हैं।

उन्होंने कहा कि कोच सालों से बच्चों को प्रैक्टिस कराते हैं, उनकी खूबी व खामी का उन्हें पता होती है लेकिन साक्षात्कार में अनुभव के नंबर नहीं जुड़ने से उक्त कोच का चयन नहीं होता तो नए कोच के साथ खिलाड़ियों को तालमेल बैठाने में समस्या आती है। उन्होंने कहा कि मेहनत अनुभवी कोच करता है लेकिन खीर खाने अनुभवहीन कोच आ जाता है। उन्होंने कहा कि विभाग को अनुभव को चयन के मापदंडो में शामिल करना चाहिए।

बता दें कि जिला खेल कार्यालय की ओर से अलग-अलग खेलों के लिए कोच की भर्ती की जा रही है, जिसमें आवेदन की अंतिम तिथि आगामी 3 मार्च व साक्षात्कार 4 मार्च को होगा। जुजुत्सु, बैडमिंटन, साइकिलिंग, फुटबॉल, सेपक टाकरा सहित कई खेलों के लिए कोच के आवेदन मांगे गए हैं।

कोच का चयन अलग-अलग मापदंडों के आधार पर किया जाता है। कोच के अनुभव को इसमें वरीयता नहीं दी जाती है।
- रशिका सिद्दीकी, सहायक खेल निदेशक

Edited By: Parakh Khabar

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