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बलिया में रोहित पाण्डेय हत्याकांड: दो अभियुक्तों को 14-14 वर्ष का सश्रम कारावास, 87 हजार रुपये जुर्माना
बलिया। जिले में हत्या के एक मामले में न्यायालय ने दो अभियुक्तों को 14 वर्ष के सश्रम कारावास और कुल 87 हजार रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा के निर्देशन में OPERATION CONVICTION के तहत मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन विभाग की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप पीड़ित पक्ष को न्याय मिला है। मामला वर्ष 2024 का है।
सब्जी खरीदते समय रोहित पाण्डेय पर किया था हमला
वादी मुकदमा के अनुसार, अभियुक्तों ने वादी और उसके भाई रोहित पाण्डेय (22 वर्ष) पर बांसडीह थाना गेट के सामने सब्जी खरीदते समय धारदार हथियार से हमला कर दिया था। हमले में रोहित गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद बांसडीह पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। विवेचना पूरी होने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया।
न्यायालय ने विभिन्न धाराओं में सुनाई सजा
बलिया पुलिस के मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन विभाग की प्रभावी पैरवी के बाद बाल न्यायालय/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट), कोर्ट संख्या-08, बलिया ने दोनों अभियुक्तों को दोषसिद्ध पाते हुए विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई।
न्यायालय द्वारा दी गई सजा का विवरण इस प्रकार है:
धारा 103(1) बीएनएस, सपठित धारा 190 बीएनएस: 14 वर्ष का सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदण्ड। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास।
धारा 109(1) बीएनएस, सपठित धारा 190 बीएनएस: 10 वर्ष का सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदण्ड। जुर्माना अदा नहीं करने पर छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास।
धारा 191(3) बीएनएस: 3 वर्ष का सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदण्ड। जुर्माना अदा नहीं करने पर दो माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास।
धारा 191(2) बीएनएस: 1 वर्ष का सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदण्ड। जुर्माना अदा नहीं करने पर दो माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास।
धारा 115(2) बीएनएस, सपठित धारा 190 बीएनएस: 1 वर्ष का सश्रम कारावास और 2 हजार रुपये अर्थदण्ड। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास।
पुलिस के अनुसार, अभियुक्तों को सजा दिलाने में मॉनिटरिंग सेल, पैरोकार और अभियोजन अधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। OPERATION CONVICTION के तहत प्रभावी पैरवी से मामले में न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि और सजा सुनिश्चित की गई।
