बलिया: ग्राम प्रधान व पंचायत सहायक के मानदेय भुगतान में गड़बड़ी पकड़ी गयी.

बलिया : ग्राम विकास विभाग की लापरवाही से ग्राम पंचायतों में फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा है। कहीं मनरेगा का फर्जी मस्टरोल बनाकर फर्जी भुगतान कराया जा रहा है तो कहीं ब्लीचिंग पाउडर और फिनायल के नाम पर हजारों रुपए डकारे जा रहे हैं। ताजा मामला पंदह ब्लॉक के ग्राम पंचायत विषहर में फर्जी मानदेय भुगतान से संबंधित है।

प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को धराशाई कर ग्राम पंचायत अधिकारी संजय चौरसिया ने ग्राम प्रधान और पंचायत सहायक को एक माह का दो बार मानदेय भुगतान कर दिया। हैरत की बात यह की ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को मामले की जानकारी होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। 

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सरकार ने ग्राम प्रधान के लिए 5000 और पंचायत सहायक को 6000 रुपए प्रतिमाह मानदेय निर्धारित किया है। विषहर के ग्राम पंचायत अधिकारी संजय चौरसिया ने बीते दो मार्च को ग्राम प्रधान संतोष कुमार यादव के खाते में जनवरी और फरवरी का (कुल मानदेय 10000 रुपए) भुगतान किया।उसी दिन पंचायक सहायक शिव कुमार वर्मा को भी जनवरी और फरवरी के मानदेय के रूप में 12000 रूपये भुगतान किया गया।


इसके 17 वें दिन 19 मार्च को एक बार फिर फरवरी के मानदेय के रूप में पंचायत अधिकारी ने ग्राम प्रधान को  5000 रूपये और पंचायत सहायक को 6000 रूपये का भुगतान कर दिया। इसकी भनक जैसे ही ग्रामीणों को हुई उनके कान खड़े हो गए। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी पूरी रिपोर्ट निकाल कर ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों से लिखित शिकायत की, लेकिन जांच का भरोसा देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

इससे ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। लोगों का आरोप है कि इसी प्रकार मनरेगा में फर्जी मस्टरोल बनाकर सरकारी धन का वारा न्यारा किया जा रहा है, लेकिन शिकायत के बाद भी कोई संज्ञान नही ले रहा है। 

मामला संज्ञान में नहीं है। संबंधित पंचायत अधिकारी से पूरी डिटेल लेकर उसकी जांच कराई जाएगी। यदि जानबूझ कर किया गया है तो आवश्यक कार्रवाई होगी।
शिवांकित वर्मा, बीडीओ पंदह

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