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“हॉरर और कॉमेडी का मेल बहुत दिलचस्प होता है”: अक्षय कुमार
मुंबई, अक्टूबर 2026: बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार इन दिनों अपनी फिल्म ‘भूत बंगला’ को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म के वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर के मौके पर अक्षय कुमार ने फैंटेसी फिल्मों की कहानी, हॉरर-कॉमेडी के आकर्षण और कॉमेडी में टाइमिंग व सहज अभिनय की भूमिका पर खुलकर बात की।
फैंटेसी फिल्मों की कहानियों से दर्शकों के जुड़ाव को लेकर अक्षय कुमार ने कहा कि कहानी में दिखाई जाने वाली हर असाधारण चीज के पीछे कोई न कोई वजह होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि हर चीज के पीछे कोई न कोई वजह होनी चाहिए, फिर चाहे वो फैंटेसी की दुनिया ही क्यों न हो।”
अक्षय ने उदाहरण देते हुए कहा कि कॉमिक बुक में भी हर किरदार की ताकत और उसके बदलाव के पीछे कोई कारण होता है। उनके मुताबिक, जब किसी काल्पनिक दुनिया में असाधारण किरदार और परिस्थितियां दिखाई जाती हैं, तो उनके पीछे की वजह बताना जरूरी होता है। इससे दर्शकों को उस दुनिया को समझने और उससे भावनात्मक रूप से जुड़ने में मदद मिलती है।
“हॉरर और कॉमेडी का मेल बहुत दिलचस्प होता है”
हॉरर-कॉमेडी फिल्मों की लोकप्रियता पर अक्षय कुमार ने कहा कि डर और हंसी का अचानक साथ आना दर्शकों के लिए बेहद मनोरंजक अनुभव बन जाता है।
उन्होंने कहा, “जब आप कोई डरावना सीन देखते हैं, तो तनाव में रहते हैं और इंतजार करते हैं कि अब क्या होने वाला है। तभी अचानक कोई मजेदार पल आ जाता है और सारा तनाव खत्म हो जाता है।”
अक्षय के मुताबिक, इसी तरह डर और हंसी का संतुलन हॉरर-कॉमेडी को खास बनाता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कॉमेडी परिस्थितियों से स्वाभाविक रूप से निकलनी चाहिए, उसे जबरदस्ती नहीं थोपा जा सकता।
उन्होंने कहा कि ‘भूत बंगला’ में भी दर्शकों को कभी डर और अगले ही पल हंसी का अनुभव कराने की कोशिश की गई है। फिल्म के जी सिनेमा पर वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर को लेकर उन्होंने कहा कि परिवार घर बैठे एक साथ इस मनोरंजक अनुभव का आनंद ले सकते हैं।
कॉमेडी में टाइमिंग और सहज प्रतिक्रिया अहम
कॉमेडी सीन में अपने अंदाज को लेकर अक्षय कुमार ने कहा कि कॉमेडी काफी हद तक सही समय पर सही बात कहने और आसपास की चीजों को ध्यान से देखने पर निर्भर करती है।
उन्होंने कहा कि रोजमर्रा की जिंदगी में कई ऐसी परिस्थितियां आती हैं, जो मजेदार होती हैं, लेकिन उस समय लोग उन्हें कॉमेडी के रूप में नहीं देखते। एक अभिनेता को इन्हीं छोटी-छोटी चीजों को पर्दे पर प्रभावी ढंग से पेश करने का मौका मिलता है।
अक्षय के मुताबिक, कई बार चेहरे का छोटा-सा हावभाव या कुछ पल का ठहराव लंबे डायलॉग से ज्यादा हंसा सकता है।
‘भूत बंगला’ जैसी फिल्म में, जहां परिस्थितियां पहले से ही असामान्य हैं, अभिनेता के लिए चुनौती यह होती है कि वह उन परिस्थितियों पर सहज प्रतिक्रिया दे। अक्षय ने कहा कि किरदार को स्थिति को गंभीरता से लेना पड़ता है, भले ही दर्शक उस पर हंस रहे हों। उनके अनुसार, यही सहजता कॉमेडी को ज्यादा प्रभावी बनाती है।
देखिए ‘भूत बंगला’ का वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर, सिर्फ जी सिनेमा पर।
