बलिया का गौरव: डॉ भारतेन्दु कुमार पाठक बने नागालैंड केंद्रीय विश्वविद्यालय में प्रोफेसर

Ballia News। बुलंद हौसले और कड़ी मेहनत से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है, इसे सच कर दिखाया है डॉ भारतेन्दु कुमार पाठक ने। ग्रामीण परिवेश में जन्मे डॉ पाठक का चयन नागालैंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्रोफेसर के पद पर हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से न सिर्फ उनके गांव बल्कि पूरे क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

शिक्षा और करियर का सफर

डॉ भारतेन्दु बलिया जिले के मुरली छपरा विकासखंड के ग्राम पंचायत हृदयपुर के निवासी हैं। वे सेवानिवृत्त शिक्षक रामनाथ पाठक इंटर कॉलेज, मुरारपट्टी के पुत्र हैं। शुरू से ही मेधावी रहे डॉ पाठक ने अपनी शिक्षा बलिया और वाराणसी से पूरी की। उन्होंने

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  • बीए : पीजी कॉलेज, दुबे छपरा
  • बीएड : दूजा देवी महाविद्यालय, सहतवार
  • एमए और पीएचडी (यूजीसी-नेट, जेआरएफ/एसआरएफ) : काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी

शैक्षणिक योगदान और पूर्व सेवाएं

डॉ भारतेन्दु 2013 से अब तक कश्मीर विश्वविद्यालय, श्रीनगर में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनके मार्गदर्शन में कई शोधार्थियों ने पीएचडी पूरी की। इसके अलावा वे झारखंड सरकार में प्रवक्ता के पद पर भी कार्यरत रह चुके हैं। हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार के प्रति समर्पित डॉ पाठक ने अहिंदी भाषी कश्मीर में हिंदी की अलख जगाई और बलिया-वाराणसी के साहित्यकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया।

गांव और क्षेत्र में खुशी की लहर

डॉ भारतेन्दु के छोटे भाई और ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मोनू पाठक ने कहा कि उनकी मेहनत और लगन ने पूरे बलिया जिले का मान बढ़ाया है। उनकी सफलता से क्षेत्र के शिक्षा, समाज और साहित्य जगत से जुड़े लोग बेहद उत्साहित हैं।

इस अवसर पर आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी स्मारक समिति, ओझवलिया के प्रबंधक सुशील कुमार द्विवेदी, डॉ क्षेमेन्द्र भारद्वाज, डॉ केके रंजन, कन्हैया पाठक, डॉ सुदर्शन प्रसाद, ब्रह्मनंद तिवारी, अविनाश कन्नौजिया, मोनू यादव, अशोक कुमार, सत्येंद्र चौबे सहित कई गणमान्य लोग बधाई देने पहुंचे।

डॉ भारतेन्दु की यह उपलब्धि न सिर्फ बलिया, बल्कि हिंदी जगत के लिए भी गौरव की बात है।

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