अयोध्या : मतदाता पुनरीक्षण में बदली तस्वीर, आंकड़ों ने सियासी दलों के दावों की खोली पोल

अयोध्या। जिले में चल रहे मतदाता पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान अचानक हालात बदलते नजर आए। विशेष अभियान दिवस पर प्रशासनिक अधिकारी फील्ड में उतरे, बूथों पर पहुंचकर स्थिति की समीक्षा की और रिपोर्ट जारी की। सामने आए आंकड़ों ने राजनीतिक दलों के कार्यों का आईना उनके सामने रख दिया, जिसमें मतदाताओं के हित में किए गए उनके प्रयास कमजोर साबित होते दिखे।

एसआईआर के तहत जिले में लगभग 3.37 लाख मतदाता शिफ्टेड, मृतक अथवा अन्य श्रेणियों में पाए गए। इसके बाद 6 जनवरी को ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन के समय कुल मतदाताओं की संख्या घटकर करीब 15.70 लाख रह गई। मतदाता संख्या में आई इस बड़ी गिरावट ने सत्ताधारी दल समेत सभी राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी।

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इसके बाद पुनरीक्षण अभियान के तहत अनमैप्ड मतदाताओं को नोटिस जारी करने और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसी क्रम में 11 जनवरी को विशेष अभियान दिवस का आयोजन किया गया। वहीं 19 जनवरी के विशेष अभियान दिवस पर प्रशासन की सक्रियता पहले से कहीं अधिक नजर आई। छोटे से लेकर बड़े अधिकारी तक बूथों पर पहुंचे, निरीक्षण किया और निर्देश दिए कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता बनने से वंचित न रहे।

इस बीच जब आंकड़े सामने आए तो राजनीतिक दलों के बड़े-बड़े दावों की हवा निकल गई। रिपोर्ट के मुताबिक, सपा, बसपा और भाजपा को छोड़कर कोई भी राजनीतिक दल जिले के सभी 2053 बूथों के लिए बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) तक नियुक्त नहीं कर सका। जबकि जिले में कुल आठ राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय राजनीतिक दल मान्यता प्राप्त हैं।

हैरानी की बात यह भी रही कि अब तक किसी भी राजनीतिक दल की ओर से एक भी दावा या आपत्ति दाखिल नहीं की गई। जबकि नियमों के अनुसार बूथ लेवल एजेंट नागरिकों से दावे और आपत्तियां एकत्र कर निर्धारित घोषणा पत्र के साथ उन्हें दर्ज करा सकते हैं। तय प्रारूप या घोषणा पत्र के बिना दी गई आपत्तियां केवल सामान्य शिकायत मानी जाती हैं। इसके बावजूद जिले में एक भी औपचारिक आपत्ति सामने नहीं आई। हालांकि ड्राफ्ट सूची के प्रकाशन से पहले और बाद में आम नागरिकों की ओर से आई शिकायतों का ब्योरा जरूर मौजूद है, जिसकी तुलना अब प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

दलवार नियुक्त बूथ लेवल एजेंटों की स्थिति

आम आदमी पार्टी (आप) – 13

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) – 2053

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) – 2053

माकपा – 0

कांग्रेस – 1286

नेशनल पीपुल्स पार्टी – 0

समाजवादी पार्टी (सपा) – 2053

अपना दल (सोनेलाल) – 0

इन आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि मतदाता पुनरीक्षण जैसे अहम लोकतांत्रिक कार्य में कई राजनीतिक दल जमीनी स्तर पर सक्रियता दिखाने में पीछे रह गए हैं।

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