- Hindi News
- मनोरंजन
- संजना सांघी बर्थडे स्पेशल: ‘दिल बेचारा’ की किज़ी से ग्लोबल यूथ एडवोकेट तक, छह साल में बनाई अलग पहचान...
संजना सांघी बर्थडे स्पेशल: ‘दिल बेचारा’ की किज़ी से ग्लोबल यूथ एडवोकेट तक, छह साल में बनाई अलग पहचान
किज़ी बसु से साक्षी वर्मा तक, संजना सांघी ने चुने चुनौतीपूर्ण किरदार; पर्दे के साथ वैश्विक मंचों पर भी बनीं युवाओं की आवाज
मुंबई, सितंबर 2026: साल 2020 में रिलीज हुई फिल्म ‘दिल बेचारा’ ने संजना सांघी को किज़ी बसु के किरदार के जरिए घर-घर में पहचान दिलाई। उनकी मासूमियत, भावनात्मक गहराई और उम्मीद से भरी अदाकारी ने दर्शकों के दिलों पर खास असर छोड़ा। बतौर लीड अभिनेत्री अपने सफर के छह साल पूरे कर चुकीं संजना ने इस दौरान खुद को सिर्फ एक अभिनेत्री तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सामाजिक बदलाव और यूथ एडवोकेसी से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी आवाज को मजबूती से सामने रखा है।
अलग-अलग किरदारों से साबित की अभिनय की रेंज
‘दिल बेचारा’ के बाद संजना सांघी ने खुद को किसी एक शैली या किरदार तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अलग-अलग जॉनर और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं को चुना।
एक्शन-थ्रिलर ‘ओम: द बैटल विदिन’ में उन्होंने एक्शन और ऊर्जा से भरपूर अलग अंदाज पेश किया। वहीं ‘कड़क सिंह’ में पंकज त्रिपाठी के साथ नजर आईं संजना ने साक्षी के किरदार के जरिए एक संवेदनशील और जटिल रिश्ते को पर्दे पर प्रभावी ढंग से पेश किया।
इन अलग-अलग भूमिकाओं के जरिए उन्होंने यह दिखाया कि वह भावनात्मक कहानियों से लेकर एक्शन और गंभीर विषयों तक, विविध तरह के किरदारों को अपनी शैली में निभाने की क्षमता रखती हैं।
फिल्मों से आगे ग्लोबल मंचों पर भी बनाई पहचान
संजना की पहचान सिर्फ भारतीय सिनेमा तक सीमित नहीं रही है। वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी युवाओं और सामाजिक विकास से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखती रही हैं।
वह संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित करने वाली सबसे कम उम्र की भारतीयों में शामिल रही हैं। इसके अलावा, वर्ल्ड बैंक से जुड़े यूथ-लेड डेवलपमेंट प्रयासों में भी उन्हें युवाओं की आवाज के तौर पर पहचान मिली है।
संजना मिलेनियम कैंपस नेटवर्क के बोर्ड ऑफ एडवाइजर्स का हिस्सा भी रह चुकी हैं, जहां उन्होंने जॉन लीजेंड समेत अन्य वैश्विक हस्तियों के साथ युवा विकास से जुड़े मुद्दों पर काम किया। इसके अलावा, वह संयुक्त राष्ट्र के Young Leaders for the Sustainable Development Goals (SDGs) कार्यक्रम में Distinguished Judge की भूमिका भी निभा चुकी हैं।
पब्लिक हेल्थ और जेंडर इक्वालिटी पर भी मुखर
संजना का सामाजिक योगदान पब्लिक हेल्थ और जेंडर इक्वालिटी जैसे महत्वपूर्ण विषयों तक फैला हुआ है। कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने ‘Here to Hear’ नाम की क्राइसिस रिस्पॉन्स पहल शुरू की थी। इसका उद्देश्य युवाओं को क्वालिफाइड मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल्स और रिमोट काउंसलिंग संसाधनों तक मुफ्त पहुंच उपलब्ध कराने में मदद करना था।
वह अपने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्पीकिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए जेंडर इक्वालिटी, मेंस्ट्रुअल हाइजीन और यूथ-लेड सोशल इनोवेशन जैसे विषयों पर भी लगातार अपनी बात रखती रही हैं।
सिनेमा और सामाजिक बदलाव का संतुलन
संजना सांघी का अब तक का सफर इस बात का उदाहरण है कि एक कलाकार अपनी रचनात्मक यात्रा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी को भी समान महत्व दे सकता है। ‘दिल बेचारा’ की किज़ी से लेकर ‘कड़क सिंह’ की साक्षी तक अलग-अलग किरदारों के जरिए उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता को विस्तार दिया, वहीं वैश्विक मंचों पर युवाओं और सामाजिक बदलाव से जुड़े मुद्दों को आवाज देकर अपनी पहचान को सिनेमा से आगे बढ़ाया।
उनकी यात्रा में विरासत सिर्फ पर्दे पर निभाए गए किरदारों से नहीं, बल्कि समाज और लोगों पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव से भी जुड़ी दिखाई देती है।
जन्मदिन के मौके पर संजना सांघी को शुभकामनाएं।
