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लोकसभा चुनाव 2024 : यूपी के मुख्यमंत्री से देश के रक्षा मंत्री तक... कुछ ऐसा रहा है राजनाथ सिंह का सियासी सफर
New Delhi : भाजपा के कद्दावर नेता माने जाने वाले राजनाथ सिंह पार्टी ने एक बार फिर भरोसा जताते हुए लखनऊ से टिकट दिया है। वह पिछले दो लोकसभा चुनाव से इस सीट पर जीत दर्ज कर रहे हैं। वर्तमान में वह देश के रक्षा मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वह भाजपा के उन नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी।
राजनाथ सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के तत्कालीन वाराणसी जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम भाभोरा में 10 जुलाई 1951 को हुआ था। यह गांव अब चंदौली जिले का हिस्सा है। वह साधारण कृषि परिवार में जन्मे थे। उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से फिजिक्स विषय में मास्टर्स की डिग्री हासिल की। इसके बाद उ्न्होंने मिर्जापुर में बतौर फिजिक्स प्रोफेसर अपनी नौकरी शुरू की। इस दौरान भी वह संघ से जुड़े रहे थे।
1974 में रखा राजनीति में कदम
राजनाथ सिंह ने 1974 में राजनीति में पहली बार कदम रखा। तब उन्हें भारतीय जनसंघ के मिर्जापुर इकाई का सचिव नियुक्त किया गया था। 1975 में ही वह जनसंघ के जिलाध्यक्ष बन गए। तब उनकी उम्र मात्र 24 साल थी। 70 के दशक में इमरजेंसी के दौरान जय प्रकाश नारायण के आंदोलन से प्रभावित होकर जेल भी गए। इस दौरान वह करीब 2 साल तक जेल में रहे।
जनता पार्टी से भारतीय जनता पार्टी का सफर
जेल से छूटने के बाद राजनाथ सिंह ने जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में बनी जनता पार्टी जॉइन कर ली और 1977 के चुनाव में मिर्जापुर से विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे। हालांकि यह साथ ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाया और राजनाथ ने 1980 में भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। तब वह पार्टी के शुरुआती सदस्यों में से एक थे। 1984 में उन्हें भाजपा के यूथ विंग का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद 1986 में वह राष्ट्रीय महासचिव और फिर 1988 में राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए।
प्रदेश के शिक्षा मंत्री से मुख्यमंत्री तक
1991 में उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया गया। बतौर शिक्षा मंत्री अपने दो साल के कार्यकाल में उन्होंने कई सुधार किए। 1992 में आया नकल विरोधी कानून इसी का हिस्सा था, जिसमें नकल को गैर जमानती अपराध बना दिया था। हालांकि इसके बाद 1994 में उन्हें राज्यसभा के लिए चुन लिया गया। 1997 में वह पार्टी के यूपी अध्यक्ष बनाए गए। साल 2000 में अपने इन्हीं कामों के दम पर राजनाथ सिंह को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री चुना गया।
सिर्फ दो साल ही रह पाए सीएम
राजनाथ सिंह साल 2000 में भले ही यूपी के मुख्यमंत्री चुन लिए गए हों, लेकिन वह ज्यादा समय इस पर पर रह नहीं पाए। 2 साल बाद प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग गया और फिर मायावती को मुख्यमंत्री चुन लिया गया। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका निभाने का मौका मिला। 2003 में उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कृषि मंत्री बनाया गया।
पहले गाजियाबाद, फिर लखनऊ से लड़ा चुनाव
राजनाथ सिंह ने 2009 का लोकसभा चुनाव गाजियाबाद की सीट से लड़ा था। इसके बाद वह 2014 और 2019 में लखनऊ से लड़े और जीते भी। 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में उन्हें गृह मंत्रालय का प्रभार दिया गया। इसके बाद 2019 में नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरी बार सत्ता में वापसी करने पर उन्हें रक्षा मंत्री बना दिया गया।
अटल बिहारी की सीट रही है लखनऊ
लखनऊ की लोकसभा सीट का भी अपना एक इतिहास है। यह देश के सबसे ज्यादा लोकसभा सीट वाले राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी है। इस सीट पर 1991 से ही भाजपा का कब्जा रहा है। अटल इस सीट से आठ बार चुनाव लड़े थे। शुरुआती तीन हार के बाद उन्होंने 1991 में पहली बार इस सीट से जीत दर्ज की। इसके बाद 1996, 1998, 1999 और 2004 में भी लगातार जीते। 2009 में यह सीट लालजी टंडन ने जीती और 2014 से यह राजनाथ सिंह की सीट हो गई है।
