कौन हैं सार्थक सिद्धांत? 17 वर्षीय छात्र को IIT कानपुर से मिला नौकरी का प्रस्ताव, OSM पोर्टल की खामियां उजागर कर बने चर्चा का विषय

कानपुर। सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम में तकनीकी खामियों को उजागर कर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरने वाले झारखंड के 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत को आईआईटी कानपुर ने नौकरी का प्रस्ताव दिया है। उनकी असाधारण तकनीकी क्षमता और विश्लेषणात्मक कौशल को देखते हुए यह प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक सार्थक की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने बताया कि सार्थक की प्रतिभा और तकनीकी समझ बेहद प्रभावशाली है। इसी को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने उन्हें नौकरी का ऑफर दिया है। छात्र की सहमति मिलने के बाद आगे की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

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OSM पोर्टल की खामियां उजागर कर आए चर्चा में

सार्थक सिद्धांत उस समय राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गए, जब उन्होंने सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से जुड़े दस्तावेजों का गहन अध्ययन कर करीब 15 तकनीकी विसंगतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उनके खुलासे के बाद मामला इतना गंभीर हो गया कि उन्हें अपनी रिपोर्ट और निष्कर्ष संसदीय समिति के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए भी आमंत्रित किया गया।

मामले की जांच के लिए केंद्र सरकार ने आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम गठित की। जांच के दौरान सार्थक ने भी तकनीकी स्तर पर महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

जांच में मिलीं सुरक्षा संबंधी गंभीर कमियां

जांच से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार OSM पोर्टल में कई गंभीर सुरक्षा खामियां पाई गईं। रिपोर्ट में बताया गया कि सिस्टम में मौजूद कमजोरियों का फायदा उठाकर कोई सामान्य स्तर का हैकर भी मास्टर पासवर्ड के माध्यम से डेटा और रिकॉर्ड में हस्तक्षेप कर सकता था। इससे परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया की सुरक्षा और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए।

ब्लॉग पोस्ट से शुरू हुई पूरी कहानी

सीबीएसई की 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणामों के बाद सार्थक ने OSM सिस्टम और उससे जुड़ी टेंडर प्रक्रिया पर विस्तृत रिसर्च की। इसके बाद उन्होंने एक ब्लॉग पोस्ट प्रकाशित कर कई सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि OSM प्रणाली के लिए टेंडर प्रक्रिया में पात्रता और तकनीकी शर्तों में कई बार बदलाव किए गए, जिससे एक विशेष कंपनी को लाभ मिला।

सार्थक ने अपने ब्लॉग में दावा किया कि टेंडर दस्तावेजों में लगभग 15 विसंगतियां थीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिस कंपनी पर पहले भी अनियमितताओं के आरोप लग चुके थे, उसे दोबारा काम सौंपा गया। उनके अनुसार पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

संसदीय समिति के सामने रखी अपनी बात

सार्थक के खुलासों के बाद उन्हें संसदीय समिति की बैठक में भी बुलाया गया, जहां उन्होंने सीबीएसई के OSM सिस्टम, मूल्यांकन प्रक्रिया और टेंडर व्यवस्था से जुड़े अपने निष्कर्षों को विस्तार से रखा। उनकी प्रस्तुति के बाद इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से लिया गया।

17 वर्ष की उम्र में तकनीकी शोध और विश्लेषण के जरिए राष्ट्रीय संस्थानों का ध्यान आकर्षित करने वाले सार्थक सिद्धांत अब युवा प्रतिभा के रूप में उभरकर सामने आए हैं। IIT कानपुर का नौकरी प्रस्ताव उनकी इसी उपलब्धि का बड़ा प्रमाण माना जा रहा है।

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