बलिया में चयनित 34 एआरपी को ब्लॉक आवंटन, बीएसए ने जारी किए विस्तृत दिशा-निर्देश

बलिया। समग्र शिक्षा अभियान के तहत जनपद के परिषदीय विद्यालयों में गुणवत्तापरक शिक्षा के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य परियोजना कार्यालय, लखनऊ के प्राविधानों एवं शर्तों के अनुरूप जनपदीय चयन समिति ने हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान विषयों के लिए चयनित 34 अकादमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) को ब्लॉक आवंटित कर दिया है। इस संबंध में बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह ने आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

बीएसए के अनुसार, एआरपी का कार्यकाल अधिकतम एक वर्ष अथवा शासन/विभाग द्वारा निर्धारित तिथि तक मान्य होगा—जो भी पहले हो। प्रत्येक वर्ष परफॉर्मेंस अप्रेजल के आधार पर जनपदीय चयन समिति की संस्तुति के बाद नवीनीकरण किया जाएगा। एआरपी का अधिकतम कार्यकाल तीन वर्ष तक सीमित रहेगा।

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विद्यालयों में सहयोगात्मक पर्यवेक्षण के लिए प्रत्येक एआरपी को प्रतिमाह अधिकतम 4500 रुपये मोबिलिटी/वाहन भत्ता देय होगा। एआरपी का वेतन उनके मूल विद्यालय से ही आहरित किया जाएगा तथा वेतनमान में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं होगी। यात्रा भत्ते के अतिरिक्त कोई अन्य प्रोत्साहन राशि देय नहीं होगी। एआरपी की कार्य अवधि मुख्यतः विद्यालय समयावधि में होगी; आवश्यकता पड़ने पर ही विद्यालय समय के बाद ब्लॉक संसाधन केंद्र पर कार्य किया जा सकेगा।

एआरपी की नियमित उपस्थिति उनके द्वारा प्रेरणा ऐप पर अपलोड की गई सपोर्टिव सुपरविजन रिपोर्ट के आधार पर मान्य मानी जाएगी। प्रत्येक एआरपी को आगामी एक माह की कार्ययोजना एवं भ्रमण कार्यक्रम जिला समन्वयक (प्रशिक्षण) के माध्यम से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और डाइट प्राचार्य को माह की 28 तारीख तक अनिवार्य रूप से प्रेषित करना होगा। यह कार्ययोजना वर्तमान विद्यालयी परिस्थितियों, उपलब्ध अकादमिक जानकारियों और आंकड़ों के आधार पर तैयार की जाएगी।

इसी प्रकार, मासिक कार्ययोजना के अनुरूप उपलब्धि आख्या आगामी माह की 5 तारीख तक संबंधित अधिकारियों को भेजनी होगी। एआरपी को प्रतिमाह न्यूनतम 30 विद्यालयों में (केजीबीवी में अधिकतम दो बार) प्रेरणा ऐप के माध्यम से ऑनलाइन सपोर्टिव सुपरविजन सुनिश्चित करना होगा।

निर्देशों के अनुसार, सभी एआरपी को जिला परियोजना कार्यालय में एक सप्ताह के भीतर कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य होगा। निर्धारित समय सीमा में कार्यभार न ग्रहण करने की स्थिति में उनका चयन स्वतः निरस्त माना जाएगा।

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