Aligarh News: AMU के कश्मीरी छात्रों ने निकाला कैंडल मार्च, जम्मू-कश्मीर में 17 मौतों की उच्च स्तरीय जांच की मांग

अलीगढ़: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में पढ़ने वाले जम्मू-कश्मीर के छात्रों ने बुधल क्षेत्र में 17 लोगों की रहस्यमय मौतों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति के नाम एक मेमोरेंडम विश्वविद्यालय प्रॉक्टर को सौंपा, जिसमें घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई।

पीर पंजाल के आदिवासी समुदायों में भय का माहौल

प्रदर्शन में शामिल AMU के रिसर्च स्कॉलर्स ने बताया कि इन मौतों के सही कारणों का अब तक खुलासा नहीं हुआ है, जिससे पीर पंजाल क्षेत्र के खानाबदोश समुदायों के बीच संकट और भय का माहौल है। उनका कहना है कि यह समुदाय पहले से ही बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और कानूनी सुरक्षा से वंचित रहा है और अब इस तरह की घटनाएं उनकी दुर्दशा को और भी बढ़ा रही हैं।

छात्रों की प्रमुख मांगें

1. उच्च स्तरीय जांच – इन मौतों के पीछे के सटीक कारणों का पता लगाया जाए और यदि इसमें कोई गड़बड़ी या लापरवाही शामिल हो तो जिम्मेदारों को सजा दी जाए।

2. शोक संतप्त परिवारों को मुआवजा – मृतकों के परिवारों को पर्याप्त वित्तीय राहत दी जाए ताकि वे इस विनाशकारी नुकसान से उबर सकें।

3. खानाबदोश समुदायों के लिए स्वास्थ्य बीमा – इन हाशिए पर पड़े समुदायों को मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं और बीमा कवरेज दिया जाए, जिससे वे भविष्य के संकटों से बच सकें।

4. फर्जी क्वारंटीन नीतियों से मुक्ति – कई आदिवासी समुदायों को अनुचित प्रतिबंधों और जबरन क्वारंटीन उपायों का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी सामाजिक और आर्थिक परेशानियां बढ़ती हैं। छात्रों ने इन नीतियों की तत्काल समीक्षा की मांग की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न हो।

"सरकार हमारी आवाज़ सुने" – AMU के कश्मीरी छात्रों की अपील

छात्रों ने केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि कश्मीर सरकार से जो उम्मीदें थीं, वह उन पर खरी नहीं उतर रही।

"कश्मीर सरकार संवेदनशील नहीं, सिर्फ फोटो खिंचवाकर लौट रही"

छात्रों ने आरोप लगाया कि कश्मीर की सरकार इस घटना को गंभीरता से नहीं ले रही, क्योंकि यह क्षेत्र पिछड़ा हुआ है। 10 साल बाद कश्मीर में चुनी हुई सरकार बनी है, लेकिन वह जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही।

उन्होंने कहा, "जब कश्मीर की मुख्यमंत्री मौके पर जाती भी हैं, तो सिर्फ फोटो खिंचवाकर लौट आती हैं।" अब तक मृतकों के परिवारों को कोई मुआवजा नहीं दिया गया, न ही इस मामले की जांच की कोई ठोस पहल हुई है।

"भारत सरकार तत्काल कदम उठाए"

छात्रों ने भारत सरकार से इस मानवीय संकट को हल करने के लिए त्वरित और ठोस कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि हम सरकार की न्यायप्रियता और सभी नागरिकों के कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर विश्वास करते हैं और आशा करते हैं कि हमारी याचिका पर तुरंत ध्यान दिया जाएगा।

कश्मीरी छात्रों की यह अपील पीर पंजाल क्षेत्र के आदिवासी समुदायों के अधिकारों और न्याय की लड़ाई को उजागर करती है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस पर क्या कार्रवाई करती है।

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