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डॉ. अतुल मलिकराम की नई पुस्तक ‘दिल सियासत’ में भारतीय राजनीति के बदलते आयामों की चर्चा
इंदौर, 22 सितंबर 2026: राजनीतिक रणनीतिकार, लेखक और समाजसेवी डॉ. अतुल मलिकराम की नई पुस्तक ‘दिल सियासत’ पाठकों के बीच आ गई है। राजनीति और लोकतंत्र पर केंद्रित इस पुस्तक में आजादी के बाद भारतीय राजनीति में आए बदलाव, राजनीतिक विचारधाराओं, दलों के उत्थान-पतन, नेतृत्व और सामाजिक समीकरणों जैसे विषयों पर लेख शामिल हैं।
क्षेत्रीय राजनीति से सामाजिक प्रतिनिधित्व तक
‘दिल सियासत’ में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बुंदेलखंड की राजनीति के साथ युवा और महिला नेतृत्व, घुमंतू समाज तथा राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को भी जगह दी गई है।
डॉ. अतुल मलिकराम ने कहा कि राजनीति केवल सत्ता हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सोच, आकांक्षाओं और बदलाव की दिशा को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उनके मुताबिक, पुस्तक के जरिए भारतीय राजनीति को घटनाओं के क्रम के बजाय विचारधाराओं, सामाजिक सरोकारों, नेतृत्व और लोकतांत्रिक बदलावों की यात्रा के रूप में देखने का प्रयास किया गया है।
लेखकीय यात्रा को आगे बढ़ाती पुस्तक
डॉ. मलिकराम की पिछली पुस्तकों ‘दिल से’, ‘गल्लां दिल दी’, ‘दिल विल’, ‘दिल दश्त’, ‘कसक दिल की’ और ‘दिल मेरा’ में भी राजनीति के साथ समाज, संस्कृति, शिक्षा, व्यवसाय और समसामयिक मुद्दों पर उनके विचार सामने आए हैं।
‘दिल विल’ में तीसरे दल की भूमिका, एससी-एसटी राजनीतिक समीकरण, चुनावी खर्च और छोटे राज्यों जैसे विषयों पर चर्चा की गई थी, जबकि ‘कसक दिल की’ में राजनीतिक घटनाक्रम और समकालीन राजनीतिक चरित्रों पर विचार रखे गए थे।
‘दिल सियासत’ इसी लेखकीय यात्रा को व्यापक राजनीतिक संदर्भों के साथ आगे बढ़ाती है और भारतीय राजनीति के अतीत, वर्तमान तथा भविष्य की चुनौतियों को अलग-अलग विषयों के माध्यम से समझने का प्रयास करती है।
