'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर संयुक्त संसदीय समिति का गठन, 27 लोकसभा और 12 राज्यसभा सदस्य नामित

नई दिल्ली: देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रावधान वाले विधेयक पर विचार के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का गठन किया गया है। इसमें राज्यसभा के 12 और लोकसभा के 27 सदस्यों को शामिल किया गया है। राज्यसभा ने शुक्रवार को इस प्रस्ताव को ध्वनि मत से मंजूरी दी।

इससे पहले, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में 'संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024' और उससे जुड़े 'संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024' को संसद की संयुक्त समिति के विचार के लिए भेजने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने मंजूरी दे दी।

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राज्यसभा के 12 सदस्य नामित

राज्यसभा से समिति में शामिल सदस्यों में भाजपा के घनश्याम तिवाड़ी, भुनेश्वर कलिता, के लक्ष्मण, और कविता पाटीदार, जदयू के संजय झा, कांग्रेस के रणदीप सिंह सुरजेवाला और मुकुल वासनिक, तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले, डीएमके के पी. विल्सन, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, बीजद के मानस रंजन मंगराज, और वाईएसआर कांग्रेस के वी. विजय साई रेड्डी को नामित किया गया है।

लोकसभा से 27 सदस्य नामित

लोकसभा से भाजपा के पी.पी. चौधरी, सी.एम. रमेश, बांसुरी स्वराज, पुरुषोत्तम रुपाला, अनुराग ठाकुर, विष्णु दयाल शर्मा, भर्तृहरि महताब, संबित पात्रा, अनिल बलूनी, बैजयंत पांडा, और संजय जायसवाल जैसे प्रमुख नेताओं को समिति में शामिल किया गया है।

कांग्रेस से प्रियंका गांधी वाद्रा, मनीष तिवारी, और सुखदेव भगत, सपा से धर्मेंद्र यादव और छोटेलाल, तृणमूल कांग्रेस से कल्याण बनर्जी, डीएमके से टी.एम. सेल्वागणपति, और शिवसेना से श्रीकांत शिंदे जैसे नेता भी इस समिति का हिस्सा होंगे।

समिति की रिपोर्ट की समय सीमा

संयुक्त समिति को आगामी बजट सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

विधेयक का विरोध और समर्थन

लोकसभा में इन विधेयकों को 17 दिसंबर को पेश किया गया। 'संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024' को मत विभाजन में 263 मतों के समर्थन और 198 मतों के विरोध के बाद पारित किया गया। विपक्ष ने इन विधेयकों का यह कहते हुए विरोध किया कि यह संविधान के मूल ढांचे पर हमला है।

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयकों का बचाव करते हुए कहा कि एक साथ चुनाव कराने का प्रस्ताव संविधान के अनुरूप है और यह राज्यों के अधिकारों को कम करने वाला नहीं है।

इस समिति का गठन और विधेयक का प्रस्ताव देश में चुनाव सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, इसे लेकर राजनीतिक हलकों में बहस भी तेज हो गई है।

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