Bareilly News: लगन में लाल हुआ टमाटर, लहसुन की कीमतों में भी आग

बरेली: प्रमुख सब्जियों के भाव सप्ताह या पखवाड़े भर के छोटे अंतराल में दुगने पर पहुंच जाने का कोई कारण आम लोगों की समझ में नहीं आता, लेकिन अब लगातार यही हो रहा है। अब 15 दिन के अंदर टमाटर और सप्ताह भर के अंदर लहसुन का भाव दुगना हो गया है। डेलापीर मंडी के सब्जी कारोबारी आवक कम होने को इसकी वजह बता रहे हैं लेकिन लोगों का मानना है कि मुनाफाखोरी की वजह से अचानक दाम बढ़े हैं।

टमाटर और लहसुन का भाव सहालग शुरू होने से ऐन पहले बढ़ना शुरू हुआ। ऐसा ही पिछली बार हुआ था। 15 दिन पहले टमाटर का भाव थोक मंडी में 20 से 25 रुपये था जो बाजार में 35 से 40 रुपये तक बिक रहा था लेकिन अब थोक भाव 30 से 35 और फुटकर भाव 50 से 60 रुपये हो गया है। लहसुन के भाव में और तेज उछाल आया है। सप्ताह भर पहले तक ढाई सौ से तीन सौ रुपये किलो बिक रहा लहसुन अब एकाएक पांच सौ रुपये तक पहुंच गया है।

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आम लोगों को महंगाई का यह झटका फिर परेशान कर रहा है। लोगों का कहना है कि बाकी सब्जियां इस बार पहले से काफी महंगी है, अब टमाटर और लहसुन जैसी रोज इस्तेमाल होने वाली सब्जियों के बेतहाशा महंगे हो जाने से रसोई पर असर पड़ रहा है।

खेतों से आठ-दस रुपये किलो के रेट पर ही उठ रहा है टमाटर
डेलापीर मंडी के सब्जी कारोबारियों का कहना है कि इस साल शीतलहर का ज्यादा प्रकोप रहने से टमाटर की फसल प्रभावित हुई है, दूसरे अब शादियों का सीजन शुरू हो जाने से मांग भी बढ़ गई है। दूसरी तरफ पुणे और बेंगलुरू से आने वाले टमाटर की आवक कई दिनों से करीब आधी ही रह गई है।
इसी वजह से टमाटर का भाव बढ़ा है। 

हालांकि खेतों से उठने वाले और बाजार में बिकने वाले टमाटर के रेट के बीच भारी अंतर कुछ और ही कहानी कह रहा है। किसानों का कहना है कि खेतों से करीब 15 दिन से चार सौ रुपये के औसत रेट से एक क्रेट टमाटर उठ रहा है। इस तरह, उन्हें टमाटर का भाव आठ-दस रुपये किलो के ही हिसाब से मिल रहा है। बता दें कि जिले में भी बड़े पैमाने पर टमाटर का उत्पादन होता है।

लहसुन ने तोड़ा रिकॉर्ड
डेलापीर मंडी एसोसिएशन के अध्यक्ष शुजा उर रहमान का कहना है कि बाकी सब्जियों के दाम एक सप्ताह से लगभग स्थिर हैं लेकिन लहसुन के भाव ने रिकार्ड तोड़ दिया है। मध्यप्रदेश और राजस्थान से बड़े पैमाने पर आवक होती है लेकिन वहां भी लहसुन महंगा हो गया है। दावा किया जा रहा है कि कई बरसों किसानों को लहसुन का अच्छा दाम नहीं मिल पा रहा था। इस साल अच्छा दाम मिलने से उनके चेहरे खिल गए हैं।

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