जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में बादल फटने से तबाही, 46 की मौत, राहत-बचाव अभियान तेज

किश्तवाड़/जम्मू। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चशोती गांव में गुरुवार दोपहर बादल फटने से भारी तबाही मच गई। हादसे में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के दो जवानों सहित कम से कम 46 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका है। शुक्रवार सुबह बारिश के बीच राहत व बचाव कार्य दोबारा शुरू कर दिया गया और मलबा हटाने के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल हो रहा है।

यह गांव मचैल माता मंदिर यात्रा मार्ग पर स्थित है, जहां घटना के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। 25 जुलाई से शुरू हुई यह यात्रा 5 सितंबर तक चलनी थी, लेकिन आपदा के कारण लगातार दूसरे दिन स्थगित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु चशोती तक वाहन से और फिर 8.5 किमी पैदल सफर तय करते हैं।

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सबसे ज्यादा नुकसान गांव की सामुदायिक रसोई (लंगर) को हुआ। अचानक आई बाढ़ ने दुकानों, सुरक्षा चौकी और कई इमारतों को बहा दिया। अब तक 167 घायलों को मलबे से निकाला गया है और 69 लोगों के लापता होने की पुष्टि उनके परिजनों ने की है।

अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ से 16 घर और सरकारी भवन, तीन मंदिर, चार पवन चक्कियां, 30 मीटर लंबा पुल और एक दर्जन से ज्यादा वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं। देर रात रोका गया बचाव अभियान शुक्रवार सुबह फिर शुरू हुआ। पुलिस, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय लोग मिलकर जीवित बचे लोगों की तलाश में जुटे हैं।

वीडियो फुटेज में कीचड़ और मलबे का तेज बहाव दिख रहा है, जिसने रास्ते में आने वाली हर चीज को तबाह कर दिया। कई घर ढह गए, सड़कें बंद हो गईं और भूस्खलन ने हरे-भरे इलाके को मलबे में बदल दिया। उपायुक्त पंकज कुमार शर्मा और एसएसपी नरेश सिंह मौके पर राहत कार्य की निगरानी कर रहे हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

यह हादसा हिमालयी क्षेत्रों में नौ दिन के भीतर दूसरी बड़ी आपदा है। इससे पहले 5 अगस्त को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में आई बाढ़ में एक व्यक्ति की मौत हुई थी और 68 लोग लापता हो गए थे।

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