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रूस में फंसे भारतीय

रूस में फंसे करीब 20 भारतीय नागरिकों को वापस लाने की कोशिश की जा रही है। गुरुवार को विदेश मंत्रालय ने कहा कि एक भारतीय एजेंट द्वारा रूसी सेना के लिए ‘सेना सुरक्षा सहायक’ के रूप में भर्ती किए जाने के बाद अनुमानित 20 लोग अभी भी रूस में फंसे हुए हैं। बताया जाता है कि इन लोगों को यूक्रेन में लड़ने के लिए भेजा गया है। इन सभी को अच्छी नौकरी के बहाने रूस बुलाया गया था। हर एक से तीन लाख रुपये तक लिए गए।
रूस-यूक्रेन संघर्ष के बारे में मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की स्थिति स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि भारत इस मुद्दे का समाधान चर्चा,कूटनीति और निरंतर संपर्क के माध्यम से चाहता है। गौरतलब है कि दो साल पहले रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था। अब तक उसके हजारों सैनिक मारे जा चुके हैं। युद्ध थमने के फिलहाल कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं,बल्कि हाल के दिनों में रूस ने हमले और तेज कर दिए हैं।
विश्लेषक कहते हैं कि भारत से भर्ती किए गए ये लोग रूस के दुनियाभर से सैनिक भर्ती करने के अभियान का हिस्सा भर हैं अन्य कई देशों के लोगों को रूसी सेना में भर्ती करके यूक्रेन में मोर्चे पर भेजा गया है। इससे पहले बहुत से नेपाली लोगों के रूस जाकर यूक्रेन में लड़ने की भी खबरें आई थीं। अब भारत सरकार इन लोगों को लेकर चिंतित नजर आ रही है। भारत कोशिश कर रहा है कि उन्हें रूसी सेना की सेवा से मुक्ति देकर वापस भेज दिया जाए।
सरकार को संघर्षरत देशों में जाने वालों के लिए अपनी प्रक्रियाओं की समीक्षा करनी चाहिए। ‘उत्प्रवास जांच आवश्यक’ देशों की सूची को अद्यतन करना चाहिए ताकि ऐसे काम के लिए विदेश यात्रा करने वाले भारतीयों के अनुबंधों की अधिक गहनता से जांच की जा सके,उन्हें बेहतर सलाह दी जा सके और सुरक्षा भी प्रदान की जा सके। साथ ही सरकार को विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी करने वालों के नेटवर्क की भी जांच करनी चाहिए,जो काम की प्रकृति को पूरी तरह से बताए बिना विदेश में नौकरी चाहने वाले भारतीयों से मोटी रकम वसूलते हैं।