Prayagraj News: अभिनेत्री ममता कुलकर्णी बनीं किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर, लिया संन्यास

प्रयागराज। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री रह चुकीं ममता कुलकर्णी ने संन्यास धारण कर किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर का पद ग्रहण किया है। महाकुंभ 2025 के पवित्र अवसर पर प्रयागराज के संगम तट पर उन्होंने संन्यास की दीक्षा ली और पिंडदान किया। अब वे श्री यामाई ममता नंद गिरी के नाम से जानी जाएंगी। शुक्रवार को किन्नर अखाड़े के आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने उनका पट्टाभिषेक कर महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान की।

साध्वी के रूप में नई शुरुआत

संन्यास लेने के बाद ममता कुलकर्णी ने कहा, "यह मेरा सौभाग्य है कि मैंने महाकुंभ के दौरान संन्यास लिया। मेरे गुरु श्री चैतन्य गगन गिरि ने 23 साल पहले कुपोली आश्रम में मुझे दीक्षा दी थी। अब मैं पूरी तरह से संन्यासिनी बन चुकी हूं। महादेव और महाकाली के आदेश पर मैंने आज पिंडदान किया। अब मैं किन्नरों, सनातन धर्म और महिलाओं के हित में काम करूंगी।"

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महाकुंभ से शुरू की आध्यात्मिक यात्रा

महाकुंभ से अपने नए जीवन की शुरुआत करने के बाद ममता ने बताया कि वे संगम, काशी और अयोध्या की यात्रा करेंगी। उनके इस निर्णय ने उन्हें पूरी तरह से एक साध्वी के रूप में स्थापित कर दिया है।

ममता कुलकर्णी: बॉलीवुड से आध्यात्मिक जीवन तक का सफर

ममता कुलकर्णी ने 1992 में फिल्म तिरंगा से अपने करियर की शुरुआत की थी। 20 अप्रैल 1972 को मुंबई के एक मराठी ब्राह्मण परिवार में जन्मीं ममता को 1993 में फिल्म आशिक आवारा के लिए फिल्मफेयर अवार्ड मिला था। उन्होंने सबसे बड़ा खिलाड़ी, करण अर्जुन, बाजी और वक्त हमारा है जैसी हिट फिल्मों में काम किया।

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2002 में उन्होंने बॉलीवुड को अलविदा कह दिया। 2013 में उन्होंने अपनी किताब ऑटोबायोग्राफी ऑफ एन योगिनी प्रकाशित की, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने दुनिया की बजाय ईश्वर की साधना का रास्ता चुना।

ड्रग्स केस और विदेश प्रवास

2016 में ममता कुलकर्णी का नाम ड्रग्स की अवैध सप्लाई के मामले में चर्चा में आया। 2000 में भारत छोड़ने के बाद उन्होंने ढाई दशक विदेश में बिताए। 2024 में भारत लौटने पर उन्होंने कहा कि इतने वर्षों में देश में काफी बदलाव आया है। अपने देश लौटकर उन्होंने भावुकता जाहिर की और संन्यासिनी के रूप में नया जीवन शुरू करने का निर्णय लिया।

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