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काशी का शुभम जायसवाल कप सिरप तस्करी का बड़ा खिलाड़ी, पुलिस ने जारी किया लुकआउट सर्कुलर
UP News : कप सिरप तस्करी का किंगमेकर-शुभम जायसवाल एजेंसियों के निशाने पर है। गाजियाबाद पुलिस ने उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी कर दिया है। दुबई में उसकी लोकेशन मिली है। जांच एजेंसियां उसकी कुंडली खंगालने में जुटी है। अब तक जो तथ्य सामने आए हैं-उनसे पता चलता है कि शुभम ने पांच साल के अंदर की कप सिरप की तस्करी करके करीब 2000 करोड़ का साम्राज्य खड़ा कर दिया। उसका धंधा भारत ही नहीं बल्कि कई देशों में फैला है।
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कप सिरप के जरिये अरबों का नशीला धंधा चलाने वाले शुभम जायसवाल के बारे में पता लग रहा कि वह एमएलसी बनने के जतन में जुटा था। ताकि राजनीति में कदम रखकर अपना काला धंधा बुलंदियों पर ले जा सके।
एसटीएफ, नारकोटिक्स विभाग और दूसरी एजेंसियां उसके पूरे साम्राज्य, मददगार और विभागों में बैठे चहेतों की डिटेल जुटा रही हैं। शुभम के दुबई भागने में कौन-कौन मददगार बना-उनकी भी तलाश जारी है।
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एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार विभोर को तीन साल पहेल भी नारकोटिक्स कंट्रोल ऑफ ब्यूरो ने बंगाल से पकड़ा था। उसने विशाल के साथ 200 करोड़ रुपये की सिरप तस्करी की थी।
कप सिरप की इतने बड़े पैमाने पर तस्करी सामने आने के बाद हर कोई सन्न है। शुभम जायसवाल, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि पांच साल पहले तक उसके पास कुछ भी नहीं था-आज वो दो हजार करोड़ के साम्राज्य का मालिक बन बैठा है।
शुभम के राजनीतिक संरक्षण को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं। इस संबंध में डीजीपी को पत्र लिखकर जांच की मांग उठाई गई है।
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शुभम मूल रूप से बनारस के गायघाट का रहने वाला है। उसके पिता भोलानाथ प्रसाद भी दवा कारोबारी हैं। लेकिन उनकी छोटी सी दुकान है। कोविड के वक्त शुभम ने कप सिरप का धंधा शुरू किया और देख्तो ही देखते वह इंटरनेशनल ड्रग्स तस्करी के मास्टरमाइंड के रूप में सामने आ रहा है। उसके खिलाफ यूपी में केस दर्ज हुए हैं। एसआईटी जांच में जुटी है।
रांची में रजिस्टर्ड कराई फर्म
शुभम ने पहली फर्म झारखंड के रांची में रजिस्टर्ड कराई, जिसका नाम था शैली ट्रेडर्स। यहां से झारखंड, बंगाल और बांग्लादेश तक नशे का धंधा फैला दिया। आरोप है कि इसी फर्म से तमाम अवैध बिलिंग की गईं।
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जांच से जुड़े अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि शुभम जायसवाल कप सिरप का सुपर स्टॉकिस्ट था। रिटेलर से लेकर बड़े सप्लाई तक उसके संपर्क में थे। इस खेल में ड्रग विभाग से भी उसकी मदद से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसकी भी जांच जारी है।
