Lucknow News: गुमशुदा नाबालिगों के मामलों पर हाईकोर्ट सख्त, लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

लखनऊ : 12 वर्षीय नाबालिग किशोरी की गुमशुदगी से संबंधित बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की है। न्यायालय ने पुलिस आयुक्त को कमिश्नरेट के सभी थाना क्षेत्रों में दर्ज गुमशुदा किशोरियों के मामलों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि चार महीने से लापता किशोरी के मामले में पुलिस की सक्रियता तब दिखाई दी, जब पीड़ित पिता को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। न्यायालय ने टिप्पणी की कि याचिका दाखिल होने के बाद ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया और किशोरी को बरामद कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

यह भी पढ़े - एआई+ स्मार्टफोन की बड़ी छलांग, मई में 3 लाख से अधिक यूनिट बिक्री के साथ ₹350 करोड़ से ज्यादा का कारोबार

सुनवाई के दौरान पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) दीक्षा शर्मा द्वारा दाखिल व्यक्तिगत हलफनामे में बताया गया कि उनके अधीन आने वाले नौ थाना क्षेत्रों में कुल 81 किशोरियों के अपहरण अथवा बहला-फुसलाकर ले जाए जाने के मामले दर्ज हुए थे। इनमें से 66 किशोरियों को बरामद कर लिया गया है, जबकि 15 किशोरियां अब भी लापता हैं।

न्यायालय ने मामले के जांच अधिकारी उप निरीक्षक ओपी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी ने न तो प्रभावी जांच की और न ही किशोरी की तलाश के लिए अपेक्षित प्रयास किए। न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद ही किशोरी की बरामदगी संभव हो सकी, जो जांच की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

खंडपीठ ने आशंका जताई कि इस प्रकार के कई मामले ऐसे भी हो सकते हैं, जिनकी जानकारी पुलिस के संज्ञान में पूरी तरह नहीं आई हो। न्यायालय ने पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि तीन दिनों के भीतर ऐसे सभी मामलों की समीक्षा कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सभी थाना प्रभारियों, चौकी प्रभारियों और विवेचना अधिकारियों को विशेष रूप से सतर्क किया जाए, क्योंकि ऐसे मामले सीधे तौर पर नाबालिग लड़कियों के जीवन, सुरक्षा और स्वतंत्रता से जुड़े हैं।

साथ ही न्यायालय ने पुलिस आयुक्त को उन मामलों का भी पता लगाने का निर्देश दिया, जिनकी शिकायत अभी तक पुलिस के समक्ष नहीं पहुंची है। कोर्ट ने डीसीपी को सभी थाना प्रभारियों, क्षेत्राधिकारियों (सीओ) और जांच अधिकारियों के साथ 10 जून को न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया है।

न्यायालय ने पुलिस आयुक्त से राजधानी के सभी थानों में दर्ज गुमशुदा नाबालिग लड़कियों के मामलों पर विस्तृत स्पष्टीकरण भी तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 10 जून को निर्धारित की गई है।

खबरें और भी हैं

Latest News

Banda News: बांदा पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, 27 निरीक्षक और उपनिरीक्षकों के तबादले Banda News: बांदा पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, 27 निरीक्षक और उपनिरीक्षकों के तबादले
बांदा : कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बांदा पुलिस विभाग में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल...
Bareilly : बरेली में कारोबारी आशुतोष अग्रवाल के ठिकाने पर ईडी की छापेमारी, वित्तीय लेनदेन की जांच जारी
वाराणसी में दुकानदार की गोली मारकर हत्या, घर लौटते समय बाइक सवार बदमाशों ने किया हमला
Bahraich News: खेत गई युवती पर तेंदुए का हमला, ग्रामीणों की सतर्कता से बची जान; अस्पताल में भर्ती
UP News: महिला सिपाही की शिकायत पर पुलिसकर्मी निलंबित, वैवाहिक स्थिति छिपाने के आरोप की होगी जांच
Copyright (c) Parakh Khabar All Rights Reserved.