बरेली में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक: करोड़ों खर्च के बावजूद नहीं थम रही समस्या

बरेली : स्मार्ट सिटी बरेली में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। शहर की गलियों और सड़कों पर घूम रहे कुत्तों के झुंड आम लोगों के लिए गंभीर समस्या बन चुके हैं। आए दिन कुत्तों के हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें बच्चे, बुजुर्ग और राहगीर सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कई मामलों में लोगों की जान भी जा चुकी है।

नगर निगम द्वारा आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। निगम का दावा है कि अब तक 11,864 कुत्तों का बधियाकरण (नसबंदी) कराया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद शहर में आवारा कुत्तों की संख्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ रही है।

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हालिया घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

बीते दिनों कर्मचारी नगर क्षेत्र में आवारा कुत्तों के हमले में एक सेवानिवृत्त शिक्षिका की मौत हो गई थी, जबकि सीबीगंज क्षेत्र में एक मासूम बच्ची पर हुए जानलेवा हमले ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 200 से अधिक लोग कुत्तों के काटने के बाद एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं, जो समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।

45 हजार आवारा कुत्तों का अनुमान

नगर निगम के पशु चिकित्सा एवं कल्याण विभाग के अनुसार, किसी भी क्षेत्र में मानव आबादी के लगभग तीन प्रतिशत के बराबर आवारा कुत्तों की संख्या होती है। इसी आधार पर बरेली की लगभग 15 लाख आबादी के हिसाब से शहर में करीब 45 हजार आवारा कुत्तों के होने का अनुमान है।

वर्तमान में नदौसी स्थित श्वान बधियाकरण केंद्र की क्षमता सीमित होने के कारण हर महीने केवल 150 से 200 कुत्तों का ही बधियाकरण हो पाता है। समस्या के समाधान के लिए 1.60 करोड़ रुपये की लागत से 200 कुत्तों की क्षमता वाली नई "एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) यूनिट" तैयार की गई है, लेकिन चयनित एजेंसी से जुड़े विवादों के कारण इसका संचालन अब तक शुरू नहीं हो सका है।

सीबीगंज क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित

शहर के सीबीगंज क्षेत्र में आवारा कुत्तों का आतंक सबसे ज्यादा बताया जा रहा है। पिछले वर्ष यहां 15 से अधिक बड़ी घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें दो बच्चों की मौत भी हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि निगम की टीमें जब कुत्तों को पकड़ने पहुंचती हैं तो वे आसपास के जंगलों में छिप जाते हैं, जिससे अभियान प्रभावी नहीं हो पाता।

हालांकि, नगर निगम का दावा है कि पिछले वर्ष सीबीगंज क्षेत्र से 120 से अधिक कुत्तों को पकड़कर बधियाकरण के लिए भेजा गया था।

वर्षवार बधियाकरण का आंकड़ा

वित्तीय वर्ष

बधियाकृत कुत्तों की संख्या

2021-22

2,488

2022-23

1,745

2023-24

2,233

2024-25

2,008

2025-26

2,934

2026-27 (7 जून तक)

456

जल्द शुरू होगा नया अभियान

पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह ने बताया कि नागरिकों की शिकायतों को प्राथमिकता देते हुए प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल टीमें भेजी जाती हैं। उन्होंने कहा कि नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी, जिसके बाद नदौसी स्थित नए एबीसी सेंटर का संचालन शुरू होगा और बड़े पैमाने पर बधियाकरण अभियान चलाकर आवारा कुत्तों की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण का प्रयास किया जाएगा।

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