टीएमसी में बढ़ते अंदरूनी विवाद पर बोले अधीर रंजन चौधरी, कहा- नए चुनाव की मांग राजनीतिक हताशा का परिणाम

नई दिल्ली : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में उभर रहे आंतरिक मतभेदों और नए सिरे से चुनाव कराने की मांग को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान राजनीतिक झटकों के बाद पैदा हुई हताशा और निराशा को दर्शाते हैं तथा इनका कोई व्यावहारिक आधार नहीं है।

टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा नए चुनाव कराने की मांग और पार्टी के भीतर चल रही बयानबाजी पर प्रतिक्रिया देते हुए अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि ऐसी बातें वास्तविकता से परे हैं। उन्होंने कहा, “यह कोई स्थानीय स्तर की प्रतियोगिता नहीं है, जहां हारने के बाद तुरंत दोबारा मुकाबला कराया जा सके। इस प्रकार की मांग केवल राजनीतिक निराशा की अभिव्यक्ति है।”

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सांसदों और केंद्रीय मंत्री की बैठक से बढ़ा विवाद

गौरतलब है कि सोमवार को टीएमसी सांसदों के एक समूह की केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से हुई मुलाकात के बाद पार्टी के भीतर नया विवाद खड़ा हो गया। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कल्याण बनर्जी ने कुछ सांसदों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर झुकाव रखने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि संबंधित सांसद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना नेता मानने लगे हैं।

काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में उभरा असंतोष

टीएमसी के भीतर बढ़ते असंतोष पर टिप्पणी करते हुए अधीर रंजन चौधरी ने वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में सामने आए बागी गुट का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देशहित में काम करना कोई अपराध नहीं है और प्रत्येक जनप्रतिनिधि को अपने विवेक के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार है।

उन्होंने कहा, “इतने वर्षों तक पार्टी में रहने के बाद यदि किसी को लगता है कि अब वह देश के लिए अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकता है, तो यह उसका व्यक्तिगत निर्णय है। चुनावी हार के बाद कई प्रकार की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं।”

संसदीय विद्रोह के केंद्र में काकोली घोष

बारासात लोकसभा क्षेत्र से चार बार सांसद रह चुकीं और पेशे से चिकित्सक काकोली घोष दस्तीदार हाल के वर्षों में टीएमसी के सबसे बड़े संसदीय असंतोष का चेहरा बनकर उभरी हैं। बताया जा रहा है कि उनके नेतृत्व में सांसदों का एक समूह संसद में अलग गुट के रूप में मान्यता की मांग कर रहा है।

यह घटनाक्रम पार्टी नेतृत्व और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब पार्टी संगठनात्मक एकजुटता और आंतरिक समन्वय को लेकर बढ़ते सवालों का सामना कर रही है।

टीएमसी के भीतर बढ़ती खींचतान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है और आने वाले दिनों में इस विवाद का राजनीतिक असर और अधिक स्पष्ट हो सकता है।

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