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                <title>धर्म संस्कृति  - Parakh Khabar</title>
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                <description>धर्म संस्कृति  RSS Feed</description>
                
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                <title>चैत्र नवरात्रि 2026: आज से शुरू, जानें प्रमुख तिथियां और विशेष बातें</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Chaitra Navratri 2026</strong> : चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण और उत्साहपूर्ण पर्व है। नौ दिनों तक चलने वाला यह उत्सव मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है। इस दौरान भक्त व्रत रखते हैं। घटस्थापना के साथ ही भक्त मां दुर्गा से सुख-समृद्धि, शक्ति एवं विजय की कामना करते हैं। 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च (दिन-गुरुवार) से शुरू हो रही है, जो 27 मार्च (दिन-शुक्रवार) को राम नवमी के साथ समाप्त होगी। इसी दिन हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का भी आरंभ होगा। </p>
<p>ज्योतिषाचार्य डॉ अखिलेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि हिन्दू नववर्ष व</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.parakhkhabar.com/religion-culture/chaitra-navratri-2026--chaitra-navratri-starts-from-today-i-e--19th-march--know-special-things/article-32060"><img src="https://www.parakhkhabar.com/media/400/2026-03/catara-navaratara-ka-pahal-thana-alpashakara-thava-ka-tharashana-karata-bhakata_ebbaf0f3536da9a0021074b9d115df35.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>Chaitra Navratri 2026</strong> : चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण और उत्साहपूर्ण पर्व है। नौ दिनों तक चलने वाला यह उत्सव मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है। इस दौरान भक्त व्रत रखते हैं। घटस्थापना के साथ ही भक्त मां दुर्गा से सुख-समृद्धि, शक्ति एवं विजय की कामना करते हैं। 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च (दिन-गुरुवार) से शुरू हो रही है, जो 27 मार्च (दिन-शुक्रवार) को राम नवमी के साथ समाप्त होगी। इसी दिन हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का भी आरंभ होगा। </p>
<p>ज्योतिषाचार्य डॉ अखिलेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि हिन्दू नववर्ष व मर्यादा पुरुषोतम श्रीराम के अवतरण से पूर्व शक्ति   आराधना का महत्वपूर्ण त्योहार वासन्तिक नवरात्र 19 मार्च 2026 दिन गुरुवार से शुरू हो रहा है। इस बार मातारानी का आगमन पालकी पर हो रहा है, जो अत्यन्त शुभ नहीं है। क्योंकि देवी भागवत में डोली पर आगमन को 'ढोलायाम मरणम् ध्रुवम्' कहा गया है, जो जनहानि, रक्तपात का संकेत देगा। इससे प्राकृतिक आपदाओं महामारियों या राजनीतिक उथल-पुथल के योग बनेंग। मातारानी की विदाई 27 मार्च 2026 दिन शुक्रवार को हाथी पर होगी। आगमन भले ही डोली पर हो रहा है, लेकिन माता का हाथी पर प्रस्थान करना अत्यन्त शुभ व मंगलकारी रहेगा। देश में अच्छी वर्षा होगी। कृषि समृद्धि और समग्र आर्थिक स्थिरता आयेगी।</p>
<p>इस वर्ष प्रतिपदा तिथि की हानि से शुक्लपक्ष चौदह दिन का होगा। नवदुर्गा के साथ ही नवगौरी का भी पूजन करने का विधान हैं। इस वर्ष (रौद्र नामक) संवत्सर के राजा गुरु व मंत्री मंगल है। नवरात्र के समय शैलपुत्री, ब्रहमाचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी तथा सिद्धिदात्री के इन रूपों की आराधना की जाती है। रौद्र नामक संवत्सर होने से पृथ्वी पर अल्प वर्षा, अल्प अन्न का उत्पादन, राजतंत्र निष्ठुर होगा व वनों में अग्नि से हानि होगी। शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि का पहला दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है। नवरात्रि के प्रथम दिन ही कलशस्थापना की जाती है। मान्यता है कि कलश को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है। इसलिए नवरात्र शुरु होने से पहले पीतल तथा तांबे का कलश घर में लाना शुभ होता है। इस कलश में जल भरकर आम के पत्ते और नारियल स्थापित किया जाता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। संवत 2083 में चैत्रशुक्लप्रतिपदा का क्षय है। अतः पूर्वदिन चैत्रकृष्ण आमावस्या 19 मार्च 2026, दिन गुरुवार को प्रातः अमावस्या समाप्ति पश्चात, प्रातः 06 बजकर 40 मिनट के बाद दिनभर कलश स्थापना किया जाएगा।</p>
<p><strong>ज्योतिषाचार्य</strong><br /><strong>डॉ अखिलेश कुमार उपाध्याय</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति </category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 16:55:13 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शरद पूर्णिमा आज: चांदनी रात में रखी जाएगी खीर, 7 अक्टूबर को स्नान-दान का पुण्य अवसर, सुबह 9:16 बजे तक रहेगी पूर्णिमा तिथि</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कानपुर।</strong> सोमवार रात शरद पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। परंपरा के अनुसार, इस रात घरों में खीर बनाकर चांदनी में रखी जाएगी। वहीं, 7 अक्टूबर को भक्तजन स्नान और दान का पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पूर्णिमा तिथि मंगलवार सुबह 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगी।</p>
<p>ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि शरद पूर्णिमा का हिंदू धर्म में अत्यंत विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जो व्यक्ति श्रद्धा से व्रत रखता है, उसे माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.parakhkhabar.com/uttar-pradesh/kanpur/sharad-purnima-will-be-kept-on-moonlight-night-today-kheer/article-29308"><img src="https://www.parakhkhabar.com/media/400/2025-10/cats47.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कानपुर।</strong> सोमवार रात शरद पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। परंपरा के अनुसार, इस रात घरों में खीर बनाकर चांदनी में रखी जाएगी। वहीं, 7 अक्टूबर को भक्तजन स्नान और दान का पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पूर्णिमा तिथि मंगलवार सुबह 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगी।</p>
<p>ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि शरद पूर्णिमा का हिंदू धर्म में अत्यंत विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जो व्यक्ति श्रद्धा से व्रत रखता है, उसे माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इस बार पूर्णिमा तिथि दो दिनों तक रहेगी, जिसका कारण तिथि के घटने-बढ़ने का योग है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि पूर्णिमा तिथि 6 अक्टूबर सोमवार को दोपहर 12:24 बजे प्रारंभ होकर 7 अक्टूबर मंगलवार को सुबह 9:16 बजे तक रहेगी। इसलिए सोमवार की रात को चंद्रमा की किरणों में खीर रखी जाएगी और मंगलवार को स्नान व दान का विधान किया जाएगा।</p>
<p>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में अमृत तत्व होता है। कहा जाता है कि जब खीर को खुले आसमान में रखा जाता है, तो चांदनी की अमृत बूंदें उसमें समाहित हो जाती हैं, जिससे वह औषधीय गुणों से युक्त और स्वास्थ्यवर्धक बन जाती है।</p>
<p>मान्यता है कि इस रात चंद्रदेव की किरणें मन को शांति और शरीर को ताजगी प्रदान करती हैं। शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा, माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की आराधना करने से सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति </category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 07:14:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Parakh Khabar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Navratri 2025: सोमवार से होगी नवरात्र की शुरुआत, मंदिरों में उमड़ेगा भक्तों का सैलाब, जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कानपुर।</strong> सोमवार से नवरात्र महापर्व का आगाज़ होने जा रहा है। देवी भक्त घरों में कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की आराधना की शुरुआत करेंगे। वहीं, मंदिरों में विशेष सजावट की गई है और रविवार रात से ही जगह-जगह रोशनी से वातावरण भक्तिमय हो उठा है। नवरात्र की खरीदारी के चलते बाजारों में भीड़ देखी गई।</p>
<h2>कलश स्थापना और शुभ मुहूर्त</h2>
<p>इस बार घटस्थापना के लिए भक्तों को दो मुहूर्त मिल रहे हैं। पहला मुहूर्त सुबह और दूसरा दोपहर में रहेगा।</p>
<p>प्रातःकालीन मुहूर्त : सुबह 5:58 बजे से 7:52 बजे तक</p>
<p>अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11:37 बजे से 12:25</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.parakhkhabar.com/uttar-pradesh/kanpur/navratri-2025-navratri-will-start-from-monday-know-the-inundation/article-29118"><img src="https://www.parakhkhabar.com/media/400/2025-09/kanpur1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कानपुर।</strong> सोमवार से नवरात्र महापर्व का आगाज़ होने जा रहा है। देवी भक्त घरों में कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की आराधना की शुरुआत करेंगे। वहीं, मंदिरों में विशेष सजावट की गई है और रविवार रात से ही जगह-जगह रोशनी से वातावरण भक्तिमय हो उठा है। नवरात्र की खरीदारी के चलते बाजारों में भीड़ देखी गई।</p>
<h2>कलश स्थापना और शुभ मुहूर्त</h2>
<p>इस बार घटस्थापना के लिए भक्तों को दो मुहूर्त मिल रहे हैं। पहला मुहूर्त सुबह और दूसरा दोपहर में रहेगा।</p>
<p>प्रातःकालीन मुहूर्त : सुबह 5:58 बजे से 7:52 बजे तक</p>
<p>अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11:37 बजे से 12:25 बजे तक</p>
<h2>मंदिरों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम</h2>
<p>नवरात्र पर भीड़ को देखते हुए शहर के प्रमुख मंदिरों—बारादेवी मंदिर, तपेश्वरी देवी मंदिर, जंगली देवी मंदिर, अशोक नगर दुर्गा मंदिर और चंद्रिका देवी मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। भक्तों पर सीसीटीवी से निगरानी रखी जाएगी और प्रवेश के लिए बैरिकेडिंग व मेटल डिटेक्टर की व्यवस्था की गई है। रविवार शाम को मंदिरों को आकर्षक रोशनी से सजाया गया।</p>
<h2>पूजन सामग्री की खरीदारी</h2>
<p>रविवार को भक्तों ने पूजन सामग्रियों की जमकर खरीदारी की। फूल, मालाएं, चुनरी और प्रसाद की दुकानों पर दिनभर रौनक रही।</p>
<h2>कलश स्थापना की विधि</h2>
<p>सुबह स्नान के बाद लाल वस्त्र धारण कर स्वच्छ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर चावल की ढेरी रखें। एक मिट्टी के पात्र में जौ बोकर उस पर जल से भरा कलश स्थापित करें। कलश पर रोली से स्वस्तिक बनाकर कलावा बांधें। इसके ऊपर नारियल रखकर मां दुर्गा का आह्वान करें। कलश में सुपारी, अक्षत और सिक्का अवश्य डालें। नारियल पर चुनरी चढ़ाकर पत्तों के साथ कलश पर रखें और दीप प्रज्वलित कर विधिवत पूजा करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति </category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कानपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Sep 2025 19:13:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Parakh Khabar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शारदीय नवरात्र 2025 : ज्योतिषाचार्य डॉ. अखिलेश उपाध्याय से जानें पूजा विधि, शुभ तिथियां और खास बातें</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>शारदीय नवरात्र 2025 (Shardiya Navratri 2025) का पावन पर्व हर साल साधक बहुत ही धूमधाम और भक्ति भावना के साथ मनाते हैं। इस साल नवरात्र की शुरुआत 22 सितंबर से हो रही है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। हर दिन एक विशेष देवी को समर्पित होता है। आइए इस आर्टिकल में ज्योतिषाचार्य डॉ. अखिलेश उपाध्याय से जानते हैं इस पर्व से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें...</strong></p>
<p><strong>Shardiya Navratri 2025 : </strong>सनातन परम्परा का पवित्र पर्व मां दुर्गा को पूर्णतया समर्पित शारदीय नवरात्रि की शुरुआत अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 22 सितंबर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.parakhkhabar.com/religion-culture/sharadiya-navratri-2025-know-from-jyotishacharya-dr-akhilesh-upadhyay-pooja/article-29106"><img src="https://www.parakhkhabar.com/media/400/2025-09/maa-durga--(43)(5)(1).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>शारदीय नवरात्र 2025 (Shardiya Navratri 2025) का पावन पर्व हर साल साधक बहुत ही धूमधाम और भक्ति भावना के साथ मनाते हैं। इस साल नवरात्र की शुरुआत 22 सितंबर से हो रही है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। हर दिन एक विशेष देवी को समर्पित होता है। आइए इस आर्टिकल में ज्योतिषाचार्य डॉ. अखिलेश उपाध्याय से जानते हैं इस पर्व से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें...</strong></p>
<p><strong>Shardiya Navratri 2025 : </strong>सनातन परम्परा का पवित्र पर्व मां दुर्गा को पूर्णतया समर्पित शारदीय नवरात्रि की शुरुआत अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 22 सितंबर 2025 से हो रहा है। यह पर्व दिव्यता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है, जिसमे माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग दिनों में सतोगुण रूप (सरस्वती), रजोगुण रूप (लक्ष्मी) एवं तमोगुण रूप (काली) संयुक्त शक्तियों के नौ स्वरूपों के उपासना का कार्य होता है।</p>
<p>इनमें जन्म ग्रहण करने वाली कन्या का रूप शैलपुत्री, कौमार्य तक ब्रह्मचारिणी, विवाह के पूर्व तक षोडशी चन्द्रघंटा, नए जीवन को धारण करने वाली कूष्माण्डा, संतान को जन्म देने वाली स्कंदमाता, संयम और साधनारत मां कात्यायनी, पति की अकारण मृत्यु जीतने वाली कालरात्रि, संसार का उपकार करने वाली महागौरी एवं सर्वसिद्धि प्रदायिनी सिद्धिदात्री हैं। नवरात्रि पर इस बार बुधादित्य राजयोग, भद्र राजयोग, धन योग (चंद्र मंगल युति तुला राशि में), त्रिग्रह योग (चंद्रमा बुध और सूर्य की युति कन्या राशि में) और गजेसरी राजयोग का शुभ संयोग रहने वाला है।</p>
<p>नवरात्रि का आरंभ गजकेसरी राजयोग से हो रहा है क्योंकि, गुरु और चंद्रमा एक दूसरे से केंद्र भाव में होंगे। गुरु मिथुन राशि में और चंद्रमा कन्या राशि में गोचर करेंगे, जिससे गजकेसरी राजयोग का निर्माण होगा। जगत जननी आदिशक्ति का हाथी पर आगमन हो रहा है, जो सुखप्रद, देश में धन समृद्धि में बढ़ोतरी, कृषि में वृद्धि होने के साथ मानव जीवन पर सकारात्मक प्रभाव वाला होगा।</p>
<p>माता का प्रस्थान 2 अक्टूबर गुरुवार विजयदशमी के दिन मनुष्य की सवारी पर होगा, जो शुभ संकेत होने के साथ लोगों के बीच प्रेम बढ़ेगा और सुथ शांति बनी रहेगी। प्रथम दिन उत्तम मुहूर्त में घटस्थापना करके सभी देवताओं को आवाहन, आसान एवं अर्ध्य प्रदान करे। बाकी दिनों में आवाहित देवताओं के पूजन के पश्चात षोडशोपचार से मां का पूजन करे। इसके बाद दुर्गा सप्तशती पाठ स्वयं करे या योग्य पंडित से कराए।</p>
<p>पूजन में बिल्व पत्र, शमी पत्र, लाल कनेर, चमेली के पुष्प का प्रयोग करें। दुर्गा पूजा में दूर्वा, तुलसी का प्रयोग निषिद्ध है। दूर्वा केवल गणेश पूजन 'में उपयोग कर सकते है। शाम की आरती में मां भगवती दुर्गा की 14 बार आरती उतारने का विधान है। 4 बार चरणों में, 2 बार नाभि पर, 1 बार मुख पर एवं 7 बार संपूर्ण शरीर पर आरती उतारना चाहिए। आरती की बत्तियों की संख्या विषम होनी चाहिए।अतः नवरात्रि साधना से साधक के जीवन का परिशोधन, आत्मचेतन की प्रखरता प्रगाढ़ होगी।</p>
<p><strong>पूजा मंत्र</strong><br /><strong>सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।</strong><br /><strong>शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।</strong></p>
<p><strong>ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।</strong><br /><strong>दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।</strong></p>
<p><strong>या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,</strong><br /><strong>नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। </strong></p>
<p><strong>शारदीय नवरात्रि 2025 की तिथि लिस्ट    </strong>     <br />1) नवरात्रि पहला दिन 22 सितंबर 2025 : मां शैलपुत्री की पूजा<br />2) नवरात्रि दूसरे दिन 23 सितंबर 2025 : मां ब्रह्मचारिणी की पूजा।<br />3) नवरात्रि तीसरे दिन 24 सितंबर 2025 : मां चंद्रघंटा की पूजा।<br />4) नवरात्रि तीसरे दिन 25 सितंबर 2025 : मां चंद्रघंटा की पूजा।<br />5) नवरात्रि चौथा दिन 26 सितंबर 2025 : मां कूष्माण्डा की पूजा।<br />6) नवरात्रि पांचवां दिन 27 सितंबर 2025 : मां स्कंदमाता की पूजा।<br />7) नवरात्रि छठा दिन 28 सितंबर 2025 : मां कात्यायनी की पूजा।<br />8) नवरात्रि सातवां दिन 29 सितंबर 2025 : मां कालरात्रि की पूजा।<br />9) नवरात्रि आठवा दिन 30 सितंबर 2025 : मां महागौरी सिद्धिदात्री की पूजा।<br />10) नवरात्रि नौवां दिन 1 अक्टूबर 2025 : मां सिद्धिदात्री की पूजा।<br />11 ) नवरात्रि दसवा दिन 2 अक्तूबर 2025 : विजयदशमी।</p>
<p><img src="https://www.parakhkhabar.com/media/2025-09/screenshot_2025-09-20-12-19-45-95_99c04817c0de5652397fc8b56c3b3817.jpg" alt="Dr Akhilesh Upadhyay"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति </category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Sep 2025 16:59:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Parakh Khabar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जीवित्पुत्रिका व्रत: मातृशक्ति की आस्था और संतान के प्रति नि:स्वार्थ प्रेम का प्रतीक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जीवित्पुत्रिका व्रत, जिसे जिउतिया या जीमूतवाहन व्रत भी कहा जाता है, माताओं की संतान के प्रति अटूट आस्था और प्रेम का प्रतीक है। यह व्रत गंधर्व राजकुमार जीमूतवाहन की स्मृति में किया जाता है, जिन्होंने नाग जाति की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं और उन्हें दीर्घायु, स्वास्थ्य व सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।</p>
<h2>व्रत विधि एवं तिथि</h2>
<p>हर साल आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को यह व्रत किया जाता है। वर्ष 2025 में यह व्रत रविवार, 14 सितंबर को सर्वार्थ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.parakhkhabar.com/religion-culture/jivitputrika-vrat-a-symbol-of-the-faith-of-the-mother-power-and-selfless-love-for-the-child/article-29016"><img src="https://www.parakhkhabar.com/media/400/2025-09/screenshot_2025-09-07-14-50-19-86_99c04817c0de5652397fc8b56c3b38171.jpg" alt=""></a><br /><p>जीवित्पुत्रिका व्रत, जिसे जिउतिया या जीमूतवाहन व्रत भी कहा जाता है, माताओं की संतान के प्रति अटूट आस्था और प्रेम का प्रतीक है। यह व्रत गंधर्व राजकुमार जीमूतवाहन की स्मृति में किया जाता है, जिन्होंने नाग जाति की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं और उन्हें दीर्घायु, स्वास्थ्य व सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।</p>
<h2>व्रत विधि एवं तिथि</h2>
<p>हर साल आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को यह व्रत किया जाता है। वर्ष 2025 में यह व्रत रविवार, 14 सितंबर को सर्वार्थ सिद्ध योग में किया जाएगा। महिलाएं इस दिन निर्जला-निराहार रहकर अपनी संतान की लंबी उम्र और मंगलकामना करती हैं। सरगही (ओठगन) का शुभ मुहूर्त प्रातः 5:53 बजे तक रहेगा, जबकि पारण 15 सितंबर को सुबह 6:27 बजे के बाद किया जाएगा।</p>
<p>व्रत करने वाली महिलाएं स्नान कर भगवान विष्णु, माता जीमूतवाहन और अपने इष्टदेव की पूजा करती हैं। दिनभर उपवास करने के बाद संध्या समय कथा श्रवण व पूजन के साथ दान-दक्षिणा देती हैं। परंपरा के अनुसार माताएं जिउतिया धागा धारण करती हैं, जिसमें सोने या चांदी से बनी जीमूतवाहन की प्रतिकृति लगी रहती है। पूजा के उपरांत यह धागा पुत्र के गले में बांधकर उसकी दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।</p>
<h2>जीमूतवाहन व्रत कथा</h2>
<p>पौराणिक कथा के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल अष्टमी के दिन जीमूतवाहन ने शंखचूड़ नामक नाग को बचाने के लिए स्वयं को गरुड़ के सामने प्रस्तुत कर दिया। उनके त्याग और साहस से प्रसन्न होकर गरुड़ ने नागों को न खाने का वचन दिया। तभी से इस व्रत को नागों की रक्षा और संतान की लंबी उम्र से जोड़ा जाता है।</p>
<p>यह व्रत खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और नेपाल में श्रद्धा व विश्वास के साथ मनाया जाता है। यह केवल संतान की दीर्घायु का पर्व ही नहीं, बल्कि माताओं के त्याग, करुणा और धर्म का जीवंत उदाहरण भी है।</p>
<p>ज्योतिषाचार्य</p>
<p>डॉ. अखिलेश कुमार उपाध्याय</p>
<p>इंदरपुर, थम्हनपुरा, बलिया</p>
<p>📞 9918861411</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति </category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Sep 2025 16:04:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Parakh Khabar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज 26 अगस्त को, जानें व्रत का महत्व और पूजन विधि</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बलिया।</strong> भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला हरितालिका तीज व्रत इस वर्ष 26 अगस्त, मंगलवार को मनाया जाएगा। ज्योतिर्विद आचार्य पंडित आदित्य पराशर के अनुसार, इस व्रत को रखने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन विवाहित महिलाएं निर्जला और निराहार व्रत रखकर अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं भी यह व्रत रखती हैं ताकि उन्हें मनचाहा वर प्राप्त हो सके।</p>
<h2>पौराणिक कथा और महत्व</h2>
<p>पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हिमालय पर्वत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.parakhkhabar.com/uttar-pradesh/ballia/hartalika-teej-2025-hartalika-teej-learn-on-august-26-the/article-28719"><img src="https://www.parakhkhabar.com/media/400/2025-08/screenshot_2025-08-25-19-07-50-72_6012fa4d4ddec268fc5c7112cbb265e7.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बलिया।</strong> भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला हरितालिका तीज व्रत इस वर्ष 26 अगस्त, मंगलवार को मनाया जाएगा। ज्योतिर्विद आचार्य पंडित आदित्य पराशर के अनुसार, इस व्रत को रखने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन विवाहित महिलाएं निर्जला और निराहार व्रत रखकर अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं भी यह व्रत रखती हैं ताकि उन्हें मनचाहा वर प्राप्त हो सके।</p>
<h2>पौराणिक कथा और महत्व</h2>
<p>पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हिमालय पर्वत के गंगा तट पर कठोर तपस्या की थी। उन्होंने कई जन्मों तक केवल शिव को पाने की साधना की और भाद्रपद शुक्ल तृतीया के दिन रेत से शिवलिंग बनाकर पूजन और स्तुति की। माता पार्वती की तपस्या और श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है।</p>
<h2>पूजन विधि</h2>
<ul>
<li>इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास करती हैं और भगवान शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।</li>
<li>व्रती महिलाएं माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री चढ़ाती हैं और बाद में इसे प्रसाद रूप में धारण करती हैं।</li>
<li>पूजा प्रदोष काल में यानी दिन-रात के संधिकाल में की जाती है।</li>
<li>इस बार तृतीया तिथि के साथ चतुर्थी तिथि का संयोग भी बन रहा है, जो शास्त्रों में अत्यंत शुभ माना गया है।</li>
<li>व्रत का पारण 27 अगस्त, बुधवार को सूर्योदय के बाद किया जाएगा।</li>
</ul>
<p>हरतालिका तीज व्रत न केवल पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत करता है बल्कि अविवाहित कन्याओं को भी जीवनसाथी के रूप में योग्य वर प्राप्त करने का आशीर्वाद देता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति </category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बलिया</category>
                                    

                <link>https://www.parakhkhabar.com/uttar-pradesh/ballia/hartalika-teej-2025-hartalika-teej-learn-on-august-26-the/article-28719</link>
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                <pubDate>Mon, 25 Aug 2025 22:09:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Parakh Khabar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संकष्ट गणेश चतुर्थी और बहुला व्रत आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>भाद्रपद</strong> कृष्ण पक्ष चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्थी को हेरम्ब चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन विद्या-बुद्धि-वारिधि गणेश तथा चन्द्रमा की पूजा की जाती है। बलिया के अमृतपाली निवासी ज्योतिर्विद आचार्य पंडित आदित्य पराशर बताते हैं कि इस व्रत को पुत्रवती माताएं पुत्र और पति की सुख-समृद्धि एवं दीर्घायु की कामना के लिए व्रत रखती हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद सायंकाल गौरी-गणेश की पूजा कर नैवेद्य के साथ ईख, कंद, अमरूद, गुड़ तथा घी का भोग लगाना चाहिए।</p>
<p>यह चढ़ाया हुआ नैवेद्य रात्रि भर डलिया इत्यादि से ढ़क कर रख देना चाहिए, जिसे <strong>पहार</strong> कहा जाता है। इस ढ़के हुए पहार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.parakhkhabar.com/uttar-pradesh/ballia/sankashta-ganesh-chaturthi-and-bahula-fast-know-the-auspicious-time/article-28389"><img src="https://www.parakhkhabar.com/media/400/2025-08/screenshot_2025-08-12-05-58-18-08_6012fa4d4ddec268fc5c7112cbb265e7.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>भाद्रपद</strong> कृष्ण पक्ष चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्थी को हेरम्ब चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन विद्या-बुद्धि-वारिधि गणेश तथा चन्द्रमा की पूजा की जाती है। बलिया के अमृतपाली निवासी ज्योतिर्विद आचार्य पंडित आदित्य पराशर बताते हैं कि इस व्रत को पुत्रवती माताएं पुत्र और पति की सुख-समृद्धि एवं दीर्घायु की कामना के लिए व्रत रखती हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद सायंकाल गौरी-गणेश की पूजा कर नैवेद्य के साथ ईख, कंद, अमरूद, गुड़ तथा घी का भोग लगाना चाहिए।</p>
<p>यह चढ़ाया हुआ नैवेद्य रात्रि भर डलिया इत्यादि से ढ़क कर रख देना चाहिए, जिसे <strong>पहार</strong> कहा जाता है। इस ढ़के हुए पहार को पुत्र द्वारा खुलवाना चाहिए तथा भाई-बंधुओं में बँटवाना चाहिए। इससे भाई-बंधुओं में आपसी प्रेम बढ़ता है। सायंकाल गौरी-गणेश की पूजन के बाद चन्द्र दर्शन होने पर दूध का अर्घ्य देकर चन्द्रमा से पुत्र की सुख तथा दीर्घायु की कामना के लिए प्रार्थना कर नैवेद्य ब्राह्मण को दान कर स्वयं पारण करना चाहिए। गणेश चतुर्थी व्रत इस माह में 12 अगस्त 2025 दिन मंगलवार को है। अर्घ्य देने का समय रात्रि में (8:37) 8 बजकर 37 मिनट के बाद है। व्रती महिलाएं 8:37 बजे के बाद पारण करें।<br /><strong>ज्योतिर्विद आचार्य </strong><br /><strong>पंडित आदित्य पराशर </strong><br /><strong>अमृतपाली, बलिया </strong><br /><strong>9454356394</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति </category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बलिया</category>
                                    

                <link>https://www.parakhkhabar.com/uttar-pradesh/ballia/sankashta-ganesh-chaturthi-and-bahula-fast-know-the-auspicious-time/article-28389</link>
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                <pubDate>Tue, 12 Aug 2025 18:20:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Parakh Khabar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गणेश चतुर्थी आशा और समृद्धि का पर्व है : डॉ. अखिलेश उपाध्याय</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>संकट</strong> चतुर्थी इस बार 12 अगस्त को यानि आज ही है। इसे बहुला या हेरंब संकट चतुर्थी भी कहा जाता है। चतुर्थी व्रत में उदया तिथि का महत्व नहीं होता है। चंद्रोदय यानी चतुर्थी व्रत में चंद्रमा के उदय का महत्व होता है। महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु और सुख संपत्ति के लिए व्रत रखती है। गणेश जी को सफेद या लाल रंग के फूल व साथ में दूर्वा भी अर्पित की जाती है। व्रत के दौरान महिलाएं सिर्फ फल और जड़े जैसे आलू, शकरकंद और गाजर आदि ही खा सकती है। चांद (चंद्रमा) को देखकर ही व्रत को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.parakhkhabar.com/uttar-pradesh/ballia/ganesh-chaturthi-is-the-festival-of-hope-and-prosperity-dr/article-28391"><img src="https://www.parakhkhabar.com/media/400/2025-08/screenshot_2025-08-12-11-22-26-69_6012fa4d4ddec268fc5c7112cbb265e7.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>संकट</strong> चतुर्थी इस बार 12 अगस्त को यानि आज ही है। इसे बहुला या हेरंब संकट चतुर्थी भी कहा जाता है। चतुर्थी व्रत में उदया तिथि का महत्व नहीं होता है। चंद्रोदय यानी चतुर्थी व्रत में चंद्रमा के उदय का महत्व होता है। महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु और सुख संपत्ति के लिए व्रत रखती है। गणेश जी को सफेद या लाल रंग के फूल व साथ में दूर्वा भी अर्पित की जाती है। व्रत के दौरान महिलाएं सिर्फ फल और जड़े जैसे आलू, शकरकंद और गाजर आदि ही खा सकती है। चांद (चंद्रमा) को देखकर ही व्रत को खोला जाता है।</p>
<p>चंद्रोदय होने पर जल में दूध, चंदन, शहद, रोली आदि डालकर ही अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य देने के बाद ही संकट चतुर्थी का व्रत पूर्ण माना जाता है। चंद्रमा का उदय यानी चंद्रोदय 8:37 के बाद ही है।बहुला व्रत में गेहूं चावल व गाय के उत्पाद का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन श्री गणेश जी व गौ माता का पूजन अर्चन किया जाता है। पूरे दिन व्रत रखने के उपरांत सायंकाल पूजा के साथ ही घर के बाहर या खुले आसमान के नीचे व्रत तोड़ा जाता है।</p>
<p><strong>ज्योतिषाचार्य</strong><br /><strong>डॉ अखिलेश कुमार उपाध्याय </strong><br /><strong>इंदरपुर, थम्हनपुरा, बलिया </strong><br /><strong> 9918861411</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति </category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बलिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Aug 2025 18:20:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Parakh Khabar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कलियुग में राम नाम ही मोक्ष का मार्ग : आचार्य दयाशंकर शास्त्री</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>बलिया</strong> : आचार्य दयाशंकर शास्त्री जी महाराज ने कहा कि कलियुग में राम नाम का जाप ही मानव जीवन को सार्थक और मुक्त करने का साधन है। उन्होंने कहा कि इस युग में महायज्ञ सबसे श्रेष्ठ और प्रभावशाली आध्यात्मिक अनुष्ठान है, जो न केवल आत्मिक शुद्धि बल्कि पर्यावरण की भी शुद्धि करता है। विज्ञान भी यह सिद्ध कर चुका है कि महायज्ञ से निकलने वाला धुआं पांच किलोमीटर तक की वायु को शुद्ध और रोगाणुरहित बना देता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह धुआं जहां तक फैलता है, वहां तक का वातावरण पवित्र हो जाता है।</p>
<p>महाराज जी शुक्रवार को बलिया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.parakhkhabar.com/uttar-pradesh/ballia/in-kali-yuga-rams-name-is-the-path-of-salvation/article-27962"><img src="https://www.parakhkhabar.com/media/400/2025-06/img-20250627-wa0208.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बलिया</strong> : आचार्य दयाशंकर शास्त्री जी महाराज ने कहा कि कलियुग में राम नाम का जाप ही मानव जीवन को सार्थक और मुक्त करने का साधन है। उन्होंने कहा कि इस युग में महायज्ञ सबसे श्रेष्ठ और प्रभावशाली आध्यात्मिक अनुष्ठान है, जो न केवल आत्मिक शुद्धि बल्कि पर्यावरण की भी शुद्धि करता है। विज्ञान भी यह सिद्ध कर चुका है कि महायज्ञ से निकलने वाला धुआं पांच किलोमीटर तक की वायु को शुद्ध और रोगाणुरहित बना देता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह धुआं जहां तक फैलता है, वहां तक का वातावरण पवित्र हो जाता है।</p>
<p>महाराज जी शुक्रवार को बलिया शहर के काशीपुर, मिश्रनेवरी स्थित नव निर्मित काली मंदिर परिसर में चल रहे श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ सह शतचंडी महायज्ञ के अवसर पर प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की मूल आत्मा महायज्ञ है। यह सभी इच्छाओं की पूर्ति का माध्यम है और इसके माध्यम से वातावरण शुद्ध और सकारात्मक बनता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि महायज्ञ के दौरान होने वाले सत्संग से समाज में वैचारिक जागरूकता आती है। इससे लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन होता है। युवा वर्ग में सभ्यता और संस्कृति के प्रति सम्मान जागता है।</p>
<p>मंदिर परिसर में महायज्ञ के अंतर्गत अग्नि प्रज्वलन, पूजा-पाठ, और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हो रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति </category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>बलिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Jun 2025 07:32:38 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>गंगा दशहरा आज : मां गंगा के अवतरण दिवस पर बन रहा शुभ संयोग, जानें पूजन और दान का महत्व</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>गंगा दशहरा</strong> : ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 5 जून गुरुवार को मां गंगा के जन्मोत्सव का पावन पर्व गंगा दशहरा मनाया जाएगा। इस दिन सिद्धि योग, रवि योग, हस्त नक्षत्र समेत शुभ संयोग का निर्माण हो रहा है। इन शुभ मुहूर्त में पूजा-उपासना और दान-पुण्य के कार्यों को बड़ा महत्व है।</p>
<p>अतः इस दिन गंगा स्नान करने से तीन तरह के कायिक यानी शरीर से किए हुए पाप, चार तरह के वाचिक यानी वाणी से किए गए पाप और तीन तरह के मानसिक पापों का नाश,अक्षय पुण्य की प्राप्ति , रोग, दोष और विपत्तियों से मुक्ति</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.parakhkhabar.com/religion-culture/ganga-dussehra-today-know-the-auspicious-coincidence-on-the-incarnation/article-27693"><img src="https://www.parakhkhabar.com/media/400/2025-06/img_20241026_144208-(1).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>गंगा दशहरा</strong> : ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 5 जून गुरुवार को मां गंगा के जन्मोत्सव का पावन पर्व गंगा दशहरा मनाया जाएगा। इस दिन सिद्धि योग, रवि योग, हस्त नक्षत्र समेत शुभ संयोग का निर्माण हो रहा है। इन शुभ मुहूर्त में पूजा-उपासना और दान-पुण्य के कार्यों को बड़ा महत्व है।</p>
<p>अतः इस दिन गंगा स्नान करने से तीन तरह के कायिक यानी शरीर से किए हुए पाप, चार तरह के वाचिक यानी वाणी से किए गए पाप और तीन तरह के मानसिक पापों का नाश,अक्षय पुण्य की प्राप्ति , रोग, दोष और विपत्तियों से मुक्ति मिलेगी। साथ ही दश पापों का शमन  होगा जिसमें निषिद्ध हिंसा, परस्त्री गमन, बिना दी हुई वस्तु को लेना, कठोर वाणी, दूसरे के धन को लेने का विचार, दूसरों का बुरा करना, व्यर्थ की बातों में दुराग्रह, झूठ बोलना, चुगली करना, दूसरों का अहित करना शामिल है।</p>
<p>इस दिन पितरों का तर्पण करने से पुत्र और मनोवांछित फल प्राप्त होता है,गरीबों और जरूरतमदों को फल, जूता, चप्पल, छाता, घड़ा और सफेद वस्त्र दान करने से क्लेश दूर होता है।सूर्य देव को अर्घ्य देने से आरोग्य की प्राप्ति होती है।<br /> <br />मां गंगा मंत्र....<br />1.गंगां वारि मनोहारि मुरारिचरणच्युतं । त्रिपुरारिशिरश्चारि पापहारि पुनातु मां ।।<br />2.गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु।।<br />3.ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्।।</p>
<p><strong>ज्योतिषाचार्य</strong><br /><strong>डॉ अखिलेश कुमार उपाध्याय </strong><br /><strong>इंदरपुर,थम्हनपुरा,बलिया </strong><br /><strong>सम्पर्क सूत्र : 9918861411</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति </category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Jun 2025 18:47:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Parakh Khabar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Chaitra Navratri 2025: नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित, जानें उनकी पौराणिक महिमा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Chaitra Navratri 2025:</strong> चैत्र नवरात्रि 30 मार्च, रविवार से शुरू हो रही है। नौ दिनों तक चलने वाले ये पावन दिन भक्ति, साधना और आत्मशुद्धि के लिए विशेष माने जाते हैं। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री हिमालय की पुत्री हैं, जिनका नाम "शैल" (पहाड़) और "पुत्री" (बेटी) से मिलकर बना है। हिमालय की तरह अडिग और अचल भक्ति का प्रतीक होने के कारण नवरात्रि की शुरुआत शैलपुत्री की आराधना से की जाती है।</p>
<h3>मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा</h3>
<p>मां शैलपुत्री को देवी सती का अवतार माना जाता है। पुराणों के अनुसार, प्रजापति</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.parakhkhabar.com/religion-culture/chaitra-navratri-2025-know-her-mythological-glory-dedicated-to-maa/article-26271"><img src="https://www.parakhkhabar.com/media/400/2025-03/20254.png" alt=""></a><br /><p><strong>Chaitra Navratri 2025:</strong> चैत्र नवरात्रि 30 मार्च, रविवार से शुरू हो रही है। नौ दिनों तक चलने वाले ये पावन दिन भक्ति, साधना और आत्मशुद्धि के लिए विशेष माने जाते हैं। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री हिमालय की पुत्री हैं, जिनका नाम "शैल" (पहाड़) और "पुत्री" (बेटी) से मिलकर बना है। हिमालय की तरह अडिग और अचल भक्ति का प्रतीक होने के कारण नवरात्रि की शुरुआत शैलपुत्री की आराधना से की जाती है।</p>
<h3>मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा</h3>
<p>मां शैलपुत्री को देवी सती का अवतार माना जाता है। पुराणों के अनुसार, प्रजापति दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया। देवी सती इस अपमान को सहन नहीं कर पाईं और यज्ञ की अग्नि में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए।</p>
<p>भगवान शिव ने दक्ष यज्ञ का विध्वंस कर दिया और सती के वियोग में गहन तपस्या में लीन हो गए। इसके बाद सती ने हिमालय के घर पुनर्जन्म लिया और शैलपुत्री के रूप में जानी गईं।</p>
<h3>मां शैलपुत्री की आराधना का महत्व</h3>
<p>कहा जाता है कि जो भक्त नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना करता है, उसके वैवाहिक जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।</p>
<p>मां शैलपुत्री वृषभ (बैल) पर सवार रहती हैं, इसलिए इन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है।</p>
<p>दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण करने वाली मां शैलपुत्री शक्ति और सौम्यता का प्रतीक हैं।</p>
<p>नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा कर भक्त सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करते हैं और अपने जीवन में दृढ़ता व स्थिरता का संकल्प लेते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म संस्कृति </category>
                                    

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                <guid>https://www.parakhkhabar.com/religion-culture/chaitra-navratri-2025-know-her-mythological-glory-dedicated-to-maa/article-26271</guid>
                <pubDate>Sun, 30 Mar 2025 16:16:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Parakh Khabar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ को क्या चढ़ाना चाहिए और क्या नहीं ? जानें पूजा विधि और महत्व, ऐसे करें भगवान शिव को प्रसन्न</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Mahashivratri 2025 : </strong>महाशिवरात्रि हिन्दुओं का बड़ा पर्व होता है। महाशिवरात्रि के बारे में शास्त्रों में कहा गया है कि अगर यह व्रत मंगलवार, रविवार और शिवयोग में पड़े तो यह विशेष होता है। धर्म शास्त्रों की माने तो भगवान शंकर के पास इस सृष्टि को नष्ट करने की क्षमता है। ऐसे में उन्हें खुश रखना जरूरी है। साथ ही भगवान शंकर सभी देवताओं में सीधे होते हैं, उनकी कृपा बरसते ही जीवन धन्य हो जाता है। इसी वजह से इन्हें भोले बाबा भी कहा जाता है।</p>
<p>भगवान भोले नाथ भाव के भूखे हैं। वे किसी भी तरह से पूजा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.parakhkhabar.com/religion-culture/what-should-bholenath-offer-on-mahashivaratri-and-what-not/article-25194"><img src="https://www.parakhkhabar.com/media/400/2025-02/screenshot_2025-02-24-22-32-43-75_0b8f8be99beaf9650be75241e042b394.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Mahashivratri 2025 : </strong>महाशिवरात्रि हिन्दुओं का बड़ा पर्व होता है। महाशिवरात्रि के बारे में शास्त्रों में कहा गया है कि अगर यह व्रत मंगलवार, रविवार और शिवयोग में पड़े तो यह विशेष होता है। धर्म शास्त्रों की माने तो भगवान शंकर के पास इस सृष्टि को नष्ट करने की क्षमता है। ऐसे में उन्हें खुश रखना जरूरी है। साथ ही भगवान शंकर सभी देवताओं में सीधे होते हैं, उनकी कृपा बरसते ही जीवन धन्य हो जाता है। इसी वजह से इन्हें भोले बाबा भी कहा जाता है।</p>
<p>भगवान भोले नाथ भाव के भूखे हैं। वे किसी भी तरह से पूजा करने पर प्रसन्न हो जाते हैं। उनकी पूजा में किसी भी तरह के दिखावे की जरूरत नहीं होती है। अगर आप महाशिवरात्रि का व्रत रखते हैं या इस बार रखने की तैयारी कर रहे हैं तो कुछ बातों का ख्याल रखें। अगर नीचे दी गई सावधानियों को बरतते हुए भोले बाबा का व्रत किया जाए तो वे प्रसन्न होते हैं।</p>
<p><strong><em>महाशिवरात्रि के मौके पर शिवलिंग पर दूध और जल के साथ फल-फूल, चावल को मिलाकर जलाभिषेक किया जाता है। हालांकि जलाभिषेक के दौरान इस बात का ख्याल रखें कि टूटा चावल का चढ़ावा नहीं किया जाए।</em></strong></p>
<p><em><strong>भगवान शंकर की पूजा में बेल पत्र का चढ़ावा शुभ होता है, लेकिन खंड़ित बेलपत्र भोलेबाबा पर नहीं चढ़ाए। वही बेलपत्र चढ़ाएं जो तीन पत्तों वाले हों। कीड़े खाए हुए बेलपत्र भी भगवान पर न चढ़ाएं।</strong></em></p>
<p> <strong>सुख शांति के लिए करें यह उपाय</strong></p>
<p><strong>1.विवाह के लिए : यदि विवाह में अड़चन आ रही है तो शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर केसर मिला कर दूध चढ़ाएं।</strong></p>
<p><strong>2.धन प्राप्ति के लिए : मछलियों को आटे की गोलियां खिलाएं। इस दौरान भगवान शिव का ध्यान करते रहें।</strong></p>
<p><strong>3.मनोकामना पूर्ति के लिए : शिवरात्रि पर 21 बिल्व पत्रों पर चंदन से ॐ नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं।</strong></p>
<p><strong>4.सुख समृद्धि के लिए : शिवरात्रि पर बैल को हरा चारा खिलाएं। इससे जीवन में सुख-समृद्धि आएगी और परेशानियों का अंत होगा।</strong></p>
<p><strong>5.पितरों की शांति के लिए : शिवरात्रि पर गरीबों को भोजन कराएं, इससे आपके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होगी। साथ ही पितरों की आत्मा को शांति मिलेगी।</strong></p>
<p><strong>6.मन की शांति के लिए : पानी में काला तिल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें व ॐ नम: शिवाय मंत्र का जप करें। इससे मन को शांति मिलेगी।</strong></p>
<p><strong>7.आमदनी बढ़ाने के लिए : शिवरात्रि पर घर में पारद के शिवलिंग की योग्य ब्राह्मण से सलाह कर स्थापना कर प्रतिदिन पूजा करें। इससे आपकी आमदनी बढ़ाने के योग बनते हैं।</strong></p>
<p><strong>8.संतान प्राप्ति के लिए : शिवरात्रि के दिन आटे से 11 शिवलिंग बनाएं। 11 बार इनका जलाभिषेक करें। इस उपाय से संतान प्राप्ति के योग बनते हैं।</strong></p>
<p><strong>अलग-अलग मनोकामना के लिए इन चीजों से करें अभिषेक</strong></p>
<p>01. रोगों को शांत करने के लिए भगवान शिव का कुशोदक से अभिषेक करें।</p>
<p>02. भवन वाहन के लिए दही एवं लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने के रस से करें।</p>
<p>03. धन वृद्धि के लिए शहद एवं घी से अभिषेक करें।</p>
<p>04. पुत्र प्राप्ति के लिए दुग्ध से और यदि संतान उत्पन्न होकर मृत पैदा हो तो गोदुग्ध से अभिषेक द्वारा योग्य संतान-प्राप्ति होती है। </p>
<p>05. सहस्रनाम मंत्रों का उच्चरण करते हुए घृत की धारा से वंश वृद्धि होती है। </p>
<p>06. सरसों के तेल से अभिषेक द्वारा शत्रु पराजित होता है।</p>
<p>07. शर्करा मिलाकर दूध के अभिषेक से जड़बुद्धि विद्वान होता है। </p>
<p><strong>शिवरात्रि पर करें कालसर्प या राहू योग का निवारण</strong><br />चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा, हलवा, सरसों का तेल, काला सफेद कंबल शिवलिंग पर अर्पित करें। महामृत्युंजय मंत्र की कम से कम, एक माला 108 मंत्र अवश्य पढ़ें।</p>
<p><strong>महाशिवरात्रि पर जानिए कौन से मंत्र आपके लिए लाभदायक होंगे</strong></p>
<p><strong>मुख्य मंत्र </strong><br />ओम् नम: शिवाय<br />ओम् नमो वासुदेवाय नम:<br />ओम् राहुवे नम:</p>
<p><strong>महामृत्युंजय मंत्र    </strong><br />ओम् त्रयंम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनं!<br />उर्वारुकमिव  बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात!</p>
<p><strong>महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ की पूजा उपासना जरूर करिये </strong> <strong>मुख्यतः</strong> राहू केतु जनित कोई भी दोष हो या कुंडली में विषयोग बना हो, शिवजी के प्रसन्न होने से उपरोक्त दोषों में कमी आती है और अन्य दोषों में संतुलन बनता है।</p>
<p><strong>जानते है शिव जी को प्रसन्न करने के उपाय</strong><br />भगवान शिव अनादि व अनंत है अर्थात् न कोई भगवान शिव के प्रारंभ के बारे में जनता है नहीं अंत के बारे में, इसीलिए इन्हें अजन्मा और अनश्वर भी कहते हैं। भगवान् शिव का स्वरूप जितना रहस्यमय है। वे उतने ही सरल हैं। धर्म ग्रन्थों के अनुसार महादेव को प्रसन्न करने का सर्वश्रेष्ठ उपाय है रुद्राभिषेक।<br />विल्वपत्र शिव जी को अत्यंत प्रिय है। इसको शिवलिंग पर अर्पित करने से शिवजी अत्यंत प्रसन्न होते है।</p>
<p><strong>बिल्वपत्र कैसे चढ़ायें पूजा में क्या और करना है ये जानिए</strong><br />1- बिल्वपत्र भोले नाथ पर सदैव उल्टा रखकर अर्पित करें।<br />2- बिल्वपत्र में चक्र एवं वज्र नहीं होने चाहिए। कीड़ों द्वारा बनायें हुए सफेद चिन्हों को चक्र और डंठल के मोटे भाग को वज्र कहते है।<br />3- बिल्वपत्र कटे या फटे न हो। ये तीन से लेकर 11 दलों तक प्राप्त होते है। रूद्र के 11 अवतार है, इसलिए 11 दलों वाले बिल्वपत्र चढ़ायें जाये तो महादेव ज्यादा प्रसन्न होंगे।<br />4- बिल्वपत्र चढ़ाने से तीन जन्मों तक पाप नष्ट हो जाते है।<br />5- शिव के साथ पार्वती जी की पूजा अवश्य करें, तभी पूर्ण फल मिलेगा।<br />6- पूजन करते वक्त रूद्राक्ष की माला अवश्य धारण करें।<br />7- भस्म से तीन तिरछी लकीरों वाला तिलक लगायें।<br />8- शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ प्रसाद ग्रहण नहीं करना चाहिए।<br />9- शिवलिंग की आधी परिक्रमा ही करें।<br />10- शिव जी पर केंवड़ा व चम्पा के फूल कदापि न चढ़ायें।<br /><strong>इसके बाद शिव जी के 11 नामों का उच्चारण करे इसे करने से हर मनोकामना पूर्ण होगी।</strong><br /><strong>1- ऊॅ अघोराय नामः। 2- ऊॅ शर्वया नमः। 3-ऊॅ महेश्वराय नमः। 4- ऊॅ ईशानाय नमः। 5- ऊॅ शूलपाणे नमः। 6- ऊॅ भैरवाय नमः। 7- ऊॅ कपर्दिने नमः। 8- ऊॅ त्रयम्बकाय नमः। 9- ऊॅ विश्वरूपिणे नमः। 10- ऊॅ विरूपक्षाय नमः। 11- </strong><strong>ऊॅ पशुपते नमः।</strong><br /><strong>जानिए शिव जी पर कौन सा पुष्प चढ़ाने से क्या लाभ होगा?</strong><br />बिल्वपत्र चढ़ाने से- पापों से मुक्ति मिलेगी।<br />कमल का फूल चढ़ाने से- धन वृद्धि एंव शान्ति प्राप्त होगी।<br />कुशा के चढ़ाने से- मुक्ति एंव सौभाग्य में वृद्धि होगी।<br />दूर्वा चढ़ाने से- आयु में वृद्धि तथा दुर्घटना से रक्षा।<br />आक का फूल चढ़ाने से- पद, प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।<br />कनेर का फूल चढ़ाने से- शरीर निरोगी होगा और कष्टों में कमी आयेगी।<br />शमी पत्र चढ़ाने से- पापों का नाश होगा एंव विरोधियों का दमन होगा।<br /><strong>अगर आपको अपनी राशि मालूम हो तो राशियों के मुताबिक भोले बाबा को प्रसन्न करें। एक माला जप नीचे दिए गए राशि मंत्रो के अनुसार करे।</strong><br /><strong>मेष- ऊॅ मंगलाय नमः का जप करें एंव मीठे जल से अभिषेक करें।</strong><br /><strong>वृष- ऊॅ तेजोनिधाय नमः का जप करें तथा दही से अभिषेक करें।</strong><br /><strong>मिथुन- ऊॅ वागीशाय नमः का उच्चारण करें एंव बिल्प पत्र, भाॅग, धतूरा आदि चढ़ायें।</strong><br /><strong>कर्क- ऊॅ सोमाय नमः का जप करें व दूध व मिश्री मिलाकर आभिषेक करें।</strong><br /><strong>सिंह- ऊॅ बभ्रवे नमः मन्त्र का उच्चारण करके जल से अभिषेक करें।</strong><br /><strong>कन्या- ऊॅ जीवाय नमः मन्त्र का जाप करें एंव कुशा व दूर्वा चढ़ायें।</strong><br /><strong>तुला- ऊॅ भूमिपुत्राय नमः का उच्चारण करते हुये दूध से अभिषेक करें।</strong><br /><strong>वृश्चिक- ऊॅ महीप्रियाय नमः का जप करते हुये गन्ने के रस से अभिषेक करें।</strong><br /><strong>धनु-ऊॅ भुजाय नमः का उच्चारण करें तथा कनेर का फूल व धतूरा चढ़ायें।</strong><br /><strong>मकर- ऊॅ गंगाधराय नमः मन्त्र का जप करते हुये बिल्पपत्र व शमी की पतियाॅ चढ़ायें।</strong><br /><strong>कुम्भ- ऊॅ नीलकमलाय नमः का जप करें तथा रूद्राष्टक का पाठ करें।</strong><br /><strong>मीन- ऊॅ भास्कराय नमः मन्त्र का उच्चारण करते हुये दूध, दही, घी आदि से अभिषेक करें।</strong></p>
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<p><strong>आचार्य श्री मोहित पाठक जी </strong><br /><strong>महर्षि भृगु वैदिक गुरुकुलम्</strong><br /><strong>रामगढ़, गंगापुर, बलिया </strong><br /><strong>उत्तर प्रदेश </strong><br /><strong>प्रकल्प : अनवरत शिवार्चन गुरुकुल गंगा आरती</strong></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 25 Feb 2025 16:02:06 +0530</pubDate>
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